इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मेधावियों को जर्मनी की यूनिवर्सिटी ऑफ हाइडलबर्ग में शोध का मौका मिलेगा। ‘बिग डेटा रिसर्च’ के क्षेत्र में दुनिया के चुनिंदा संस्थानों में शामिल इस विश्वविद्यालय में शोधार्थी बीमारियों से संबंधित उन डाटा पर शोध करेंगे, जिनकी जांच रिपोर्ट का अभी तक अध्ययन नहीं हो सका है।
जर्मनी के इस विश्वविद्यालय की लैब में बड़ी संख्या में अलग-अलग तरह की बीमारियों की जांच रिपोर्ट है, जिनका अध्ययन नहीं हो पा रहा। इनके अध्ययन के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अलावा दिल्ली विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) और आईआईटी कानपुर, आईआईटी गुहावटी व आईआईटी चेन्नई का यूनिवर्सिटी ऑफ हाइडलबर्ग से समझौता हुआ है। इविवि के प्रो. सुनीत द्विवेदी ने बताया कि भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत समझौता हुआ है। रिसर्च के लिए विषय चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस रिसर्च से कई गंभीर बीमारियों के कारण को जानने तथा उनके इलाज में मदद मिलने के दावे किए जा रहे हैं।
जर्मनी में रिसर्च के लिए देश भर के इन छह संस्थानों के 15 विद्यार्थियों को चुना जाएगा। विद्यार्थी एमएससी चतुर्थ सेमेस्टर के होंगे। फिर इनमें से छह से 10 विद्यार्थियों को पीएचडी के लिए चुना जाएगा। विद्यार्थियों का रजिस्ट्रेशन उनके मूल संस्थान में होगा और पहले वर्ष वह देश में ही रिसर्च करेंगे। इसके बाद दो से तीन वर्ष जर्मनी में शोध का मौका मिलेगा। फिर आखिरी के वर्षों में भारत में रिसर्च करेंगे।
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