Resentment among lawyers increasing due to silence of government
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सरकार की चुप्पी से बढ़ रही वकीलों की नाराजगी
0 अधिकरण पर गेंद सरकार के पाले में मगर नहीं मिली कोई प्रतिक्रिया
प्रयागराज। शिक्षा सेवा अधिकरण को लेकर सरकार की चुप्पी से वकीलों की नाराजगी बढ़ती जा रही है। अधिकरण के गठन की गेंद अब पूरी तरह से सरकार के पाले में है। मुद्दा तय करने के लिए हाईकोर्ट की एक खंडपीठ के आदेश को सुप्रीमकोर्ट ने रद़्द कर दिया है। इसके बाद पूरा प्रकरण एक बार फिर सरकार के हाथ में आ गया है। मगर प्रदेश सरकार की ओर से मुद्दे पर विचार करने को लेकर अभी तक कोई संकेत नहीं मिला है जिसकी वजह से वकीलों अपना आंदोलन तेज कर दिया है। वकील अधिकरण के मुद्दे पर आर या पार की लड़ाई लड़ने के मूड में हैं।
हालांकि जानकार मानते हैं कि इस मामले पर बीच का रास्ता निकाला जा सकता है। अधिकरण की दो पीठें बना देने से मसला हल हो सकता है। हाईकोर्ट के ज्यादातर वकील इससे सहमत भी हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकीलों की ओर से हाईकोर्ट के क्षेत्राधिकार के मुताबिक बंटवारे की मांग हो रही है। बंटवारे के स्वरूप पर आगे भी चर्चा हो सकती है। वरिष्ठ अधिवक्ता बीके श्रीवास्तव का कहना है कि सर्वमान्य रूप से यदि अधिकरण के क्षेत्राधिकार का बंटवारा हो तो यह सबसे बेहतर हल होगा। यह सुप्रीमकोर्ट के निर्णय के अनुरूप भी है। ट्रिब्यूनल कहां बने यह सरकार का अधिकार है। सुप्रीमकोर्ट ने मद्रास बार एसोसिएशन के केस में कहा है कि अधिकरण का गठन हाईकोर्ट के क्षेत्राधिकार वाले स्थान में होना चाहिए। इस हिसाब से इलाहाबाद हाईकोर्ट का क्षेत्राधिकार के मुताबिक से यदि अधिकरण दोनों स्थान पर बने तो इस पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
बार के अध्यक्ष राकेश पांडेय आश्वस्त हैं कि मसले का हल उनके पक्ष में निकलेगा। इसके लिए चाहे जितनी भी लड़ाई लड़नी पड़े। वह कहते हैं कि अधिकरण की अधिसूचना अभी तक जारी नहीं हुई है। यह राष्ट्रपति के पास लंबित है। बार ने अपनी आपत्ति भी राष्ट्रपति को भेज दी है। उम्मीद है कि वह इस आपत्ति पर विचार अवश्य करेंगे। न्यायिक रास्ते समाधान अंतिम विकल्प होगा, मगर बेहतर हो कि सरकार खुद इसका समाधान कर दे। मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मिलकर पूरे मामले से उनको अवगत कराने की तैयारी है। अध्यक्ष को उम्मीद है कि मंगलवार के प्रयागराज बंद में यहां की जनता ने जो जज्बा दिखाया है उसका सकारात्मक हल अवश्य निकलेगा। वरिष्ठ अधिवक्ता आर के ओझा कहते हैं कि क्षेत्राधिकार के मुताबिक बंटवारे के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है। अधिकरण का गठन स्तरीय होना चाहिए।