प्रयागराज। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी) में बृहस्पतिवार को प्रज्ञावान मानव कंप्यूटर अंत:क्रिया पर शुरू हुए अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में आईआईटी कानपुर के प्रो. ब्रजभूषण ने कहा कि मानव भावनाओं को कैसे पढ़ा जाए, इस दिशा में हमारे मानव कंप्यूटर शोधकर्ताओं को आगे आना होगा। आईआईटी नई दिल्ली के डॉ. तपन गांधी ने मानव उपयोगकर्ताओं और कंप्यूटरों के बीच सही तालमेल में शामिल कंप्यूटिंग प्रणालियों के मूल्यांकन और बुद्धिमान सॉफ्टवेयर के बारे में जानकारी दी। सम्मेलन के आयोजक ट्रिपलआईटी के प्रो. उमाशंकर तिवारी ने बताया कि इस क्षेत्र में काम कर रहे सभी शोध कर्ताओं को एक मंच पर लाकर व्यापक शोध किए जाने की है।
प्रो. तिवारी ने बताया कि अगला सम्मेलन दक्षिण कोरिया में कराने की घोषणा की। ट्रिपलआईटी के डॉ. प्रीतीश भारद्वाज ने कहा कि एचसीआई को वर्तमान में उपयोग किए जाने वाले मुद्दों केएक समूह को समझने और विश्लेषण करने की आवश्यकता है। डॉ. सतीश कुमार सिंह ने कहा कि कंप्यूटर प्रौद्योगिकी की मुख्य समस्या आज शोधकर्ताए मानव और पर्यावरण के बीच के मुद्दों से संबंधित नहीं है बल्कि यह उपयोगकर्ता केंद्रित डिज़ाइन विधियों के उपयोग में कमी के कारण है। इससे पहले संज्ञानात्मक कम्प्यूटिंग पर कार्यशाला का शुभारंभ निदेशक पी नागभूषण ने किया। उन्होंने एचसीआई के शोधकर्ताओं को उभरती प्रौद्योगिकियों के पारिस्थितिकी तंत्र के साथ डिजाइन करने, नियंत्रित करने और बातचीत करने के तरीके की आवश्यकता पर बल दिया।