गंभीर मामलों को पुलिस किस तरीके से हल्का कर देती है, इसका उदाहरण हाईकोर्ट फ्लाईओवर पर तीन माह पूर्व हुआ हादसा है। पुलिस के मुताबिक 24 सितंबर को हाईकोर्ट फ्लाईओवर पर सड़क हादसे में दो युवकों की मौत हो गई थी। वहीं अब इस हादसे ने नया मोड़ ले लिया है। मृतकों के घरवालों ने शुक्रवार को गैर इरादतन हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई है।
परिजनों का आरोप है कि हादसे में घायल हुए तीसरे युवक ने होश में आने के बाद बताया कि एक गाड़ी ने पीछे से टक्कर मारी थी। घर वालों का आरोप है कि पुलिस ने घटना के दूसरे दिन जबरन लिखवा लिया था कि बाइक फिसल गई थी। इसी कारण डिवाइडर से टकराने के कारण दोनों की मौत हो गई थी। घरवालों द्वारा इस खुलासे के बाद अब पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
सूबेदारगंज का रहने वाला विपिन कुमार 24 सितंबर की रात अपने दोस्तों अमर चंद्र और शिवबाबू के साथ बाइक से सिविल लाइंस गया था। घर लौटते समय हाईकोर्ट फ्लाईओवर पर सड़क हादसे में विपिन और अमर चंद्र की मौत हो गई थी। शिवबाबू को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस मामले में पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की थी कि बाइक फिसलने के कारण तीनों युवक डिवाइडर से टकरा गए और दो की मौत हो गई।
काफी समय बाद जब शिवबाबू को होश आया तो उसने घटना के बारे में बताया कि फ्लाईओवर पर पीछे से किसी गाड़ी से तेजी से टक्कर मारी थी, जिसके कारण बाइक डिवाइडर से टकरा गई। इसके बाद उसे कुछ याद नहीं। अमर चंद्र के पिता रामपाल ने कैंट थाने में शुक्रवार को गैर इरादतन हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के अगले दिन थाना प्रभारी ने जबरन लिखवा लिया था कि बाइक फिसलने से उनकी मौत हुई। घटना के चश्मदीद शिवबाबू ने पूरी बात बताई, इसके बाद दोबारा तहरीर दी गई। पुलिस का कहना है कि रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। अब पता लगाया जा रहा है कि किस गाड़ी से हादसा हुआ था।
पुलिस ठंडे बस्ते में डाल देती है सड़क हादसे के मामलों को
पुलिस अब भले ही जांच की बात कह रही है, लेकिन घरवालों पर दबाव डालकर गैर इरादतन हत्या के इस मामले को साधारण दुर्घटना बना देने से पुलिस की भूमिका पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। अमर चंद्र के पिता ने लड़ने का हौसला दिखाया और रिपोर्ट दर्ज कराई। अमूमन इस तरह के तमाम मामलों में पुलिस जांच नहीं करती है। सड़क दुर्घटनाओं के मामलों को पुलिस ठंडे बस्ते में डाल देती है।