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विश्वविद्यालय के पुनर्नियु़क्त प्रोफेसरों को हटाने पर रोक

Tue, 20 Dec 2016 02:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में पुनर्नियुक्ति पर काम कर रहे प्रोफेसरों को हटाने पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। कोर्ट ने इस मामले में विश्वविद्यालय कार्य परिषद के प्रस्ताव और आठ अगस्त 2016 को रजिस्ट्रार द्वारा जारी अधिसूचना को भी रद्द कर दिया है।
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कोर्ट ने याचीगण से कहा है कि वह अपना वेतन प्राप्त करने के लिए कुलपति को प्रत्यावेदन दें। पुनर्नियुक्त प्रोफेसरों को उतने समय तक काम करते रहने की छूट दी है, जितने समय के लिए उनकी नियुक्ति हुई है। कोर्ट ने इस मामले में विश्वविद्यालय को जवाब दाखिल करने का भी निर्देश दिया है। प्रोफेसर रामकिशोर शास्त्री और आठ अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता और न्यायमूर्ति अभय कुमार की पीठ ने यह आदेश दिया।

याचिका में कहा गया कि याचीगण संस्कृत, अंग्रेजी, अर्थशास्त्र, सांख्यकी, हिंदी, विधि, गणित और रसायन शास्त्र विभागों के सुपरन्युएटेड प्रोफेसर हैं। यूजीसी द्वारा तय गाइड लाइन और एक्सपर्ट कमेटी की संस्तुति पर उनकी संबंधित विभागों में 10 मार्च 2015 को पुनर्नियुक्ति की गई थी। एक्जीक्यूटिव काउंसिल ने भी इसका अनुमोदन किया था। बाद में एक्जीक्यूटिव काउंसिल ने 25 फरवरी 2016 की बैठक में निर्णय लिया कि अवकाश प्राप्त अध्यापकों की पुनर्नियुक्ति को प्रत्येक अध्यापक की आयु और स्वास्थ्य को देखते हुए ही जारी रखा जाएगा। इसके बाद 65 वर्ष से अधिक आयु के सभी प्रोफेसरों की नियुक्ति समाप्त कर उनको नए सिरे से आवेदन करने के लिए कहा गया।
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इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। हाईकोर्ट ने प्रोफेसरों को हटाने का आदेश रद्द कर दिया। इसके बावजूद उनको वापस काम पर यह कहते हुए नहीं लिया गया कि हाईकोर्ट ने किसी की नियुक्ति को लेकर अपने आदेश में कुछ नहीं कहा है। कोर्ट ने प्रोफेसरों को पुनर्नियुक्ति से हटाने का आदेश रद्द कर दिया है। 
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