नगर निगम ने किराए पर कमरे या मकान उठाने वालों को राहत दी है। शुक्रवार को नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक में तय हुआ है कि ऐसे मकान मालिक जिनके घर में दस से ज्यादा कमरे हैं और उन्होंने कुछ कमरे किराए पर दे रखे हैं, उनको अब नगर निगम प्रशासन को व्यावसायिक शुल्क की बजाय किराएदारी शुल्क देना होगा। किराएदारी शुल्क सिर्फ उन कमरों का लिया जाएगा, जिसमें किराएदार हैं।
पुनरीक्षित बजट पर चर्चा के लिए नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक में निगम की आय से जुड़े तमाम मामलों पर चर्चा हुई। इस दौरान सदस्यों ने ऐसे भवनों की भी चर्चा की जहां किराएदार रह रहे हैं और नगर निगम उन मकान मालिकों से व्यावसायिक शुल्क वसूल रहा है। काफी चर्चा के बाद तय हुआ कि निगम प्रशासन अब किराए पर कमरा देने वाले मकान मालिकों से व्यावसायिक शुल्क नहीं बल्कि किराएदारी शुल्क लेगा। यह शुल्क सिर्फ उन्हीं मकान मालिकों से लिया जाएगा, जिनके भवन में दस से ज्यादा कमरे हैं। साथ ही जितने कमरे में किरायेदार हैं, सिर्फ उन्हीं कमरों का ही किराएदारी शुल्क निगम प्रशासन वसूलेगा।
बैठक में होटल आदि से लाइसेंस शुल्क से होने वाली आय का लक्ष्य 15 लाख से बढ़ाकर 25 लाख करने का भी निर्णय लिया गया। मेयर अभिलाषा गुप्ता और नगर आयुक्त शेषमणि पांडेय की मौजूदगी में हुई बैठक में नर्सरी स्कूल रिक्शा ट्रॉली से होने वाली आय का लक्ष्य छह हजार से बढ़ाकर 15 हजार करने, सार्वजनिक शौचालय से होने वाली आय का लक्ष्य पांच लाख करने की भी बात कही गई। पार्षद शिवसेवक सिंह के प्रस्ताव पर मरे हुए पशुओं के शव निस्तारण के लिए शहर में एक निर्धारित स्थान सुनिश्चित करने का भी निर्णय लिया गया। तय हुआ कि ससुर खदेरी के पास नगर निगम की एक जमीन है, वहीं मरे हुए पशुओं के शव का निस्तारण किया जाए।
बैठक में एमएनएलपी और सीएफओ से नगर निगम के आय व्यय की ऑडिट रिपोर्ट अगली बैठक में रखने का कहा गया। महापौर ने कहा कि अगर अगली बैठक में रिपोर्ट न रखी गई तो नगर आयुक्त संबंधित अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करें। इसके अलावा करेली में नगर निगम की 365 बीघा जमीन पर जिन लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है, उन्हें चिह्नित करके निगम प्रशासन टैक्स वसूले। बैठक में पार्षद सुशील यादव, अतहर रजा लाडले, पुष्पा कुशवाहा, राजेश निषाद, नीरज गुप्ता आदि के साथ नगर निगम के तमाम अफसर मौजूद रहे।
नगर निगम द्वारा शहर के 20 हजार भवनों को इस बार व्यावसायिक शुल्क के लिए चिह्नित किया गया था। इसमें से तकरीबन साढ़े पांच हजार भवन ऐसे थे जहां किराएदार रह रहे थे। इन भवनों को नगर निगम की ओर से नोटिस दिया गया था। अब नई व्यवस्था के बाद इन मकान मालिकों को किराएदारी शुल्क देना होगा। बता दें कि व्यावसायिक शुल्क के मुकाबले किराएदारी शुल्क काफी कम है।