इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के मामले में आरोपी व्यापारी को जमानत दे दी। कोर्ट ने कहा कि याची की फर्म के खिलाफ जीएसटी विभाग ने न तो जीएसटी अधिनियम के तहत कोई नोटिस जारी किया और न ही फर्म का पंजीकरण रद्द किया। ऐसे में उपलब्ध दस्तावेजों और परिस्थितियों को देखते हुए जमानत का आधार बनता है।
यह आदेश न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की एकल पीठ ने महावीर शरण पहाड़िया की जमानत अर्जी पर दिया। याची के खिलाफ औरैया के सदर थाने में धोखाधड़ी और जालसाजी समेत गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज हुई थी। जिला अदालत से जमानत अर्जी खारिज किए जाने के बाद उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
औरैया स्थित एसएस शारदा ट्रेडिंग कंपनी पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जीएसटी पंजीकरण लेकर करीब 2.29 करोड़ रुपये का फर्जी आईटीसी लेने का आरोप है। जांच में फर्म को गैर मौजूद बताया गया। शासकीय अधिवक्ता ने दलील दी कि उक्त फर्म ने कई कंपनियों को बिना माल आपूर्ति किए आईटीसी पास किया, जिससे राजस्व को नुकसान हुआ।
याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि महावीर शरण पहाड़िया का नाम एफआईआर में नहीं है। उनकी फर्म एम/एस सुनील ट्रेडिंग कंपनी का एसएस शारदा ट्रेडिंग कंपनी से कोई सीधा लेनदेन नहीं था। वहीं, राज्य सरकार और जीएसटी विभाग की ओर से जमानत का विरोध करते हुए दलील दी गई कि जांच में यह सामने आया है। कि तीन बिलों के जरिये करीब 5.10 लाख रुपये के लेनदेन पर 2.55 लाख रुपये का आईटीसी पास किया गया। जिसे आवेदक की फर्म ने अपने रिटर्न में क्लेम किया।
कोर्ट ने याची को व्यक्तिगत मुचलका और दो जमानतदारों पर रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही शर्त लगाई कि वह साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करेगा, किसी गवाह को प्रभावित नहीं करेगा और ट्रायल में नियमित रूप से उपस्थित रहेगा।