कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के लंबे संघर्ष के बाद केंद्र सरकार ने खाद्य व्यापारियों को राहत दी है। अब जीएसटी और आयकर की तर्ज पर फूड लाइसेंस के प्रति वर्ष नवीनीकरण (रिन्यूअल) की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत अब एक बार रजिस्ट्रेशन या लाइसेंस लेने के बाद यह हमेशा के लिए वैध रहेगा।
कैट के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र गोयल ने बताया कि सरकार ने न केवल नवीनीकरण की प्रक्रिया खत्म की है, बल्कि व्यापारियों के टर्नओवर की सीमा में भी बड़ी राहत दी है। पहले 12 लाख तक के टर्नओवर पर रजिस्ट्रेशन कराना होता था, लेकिन अब इसकी सीमा बढ़ाकर डेढ़ करोड़ रुपये कर दी गई है।
वहीं, अब 50 करोड़ रुपये तक के सालाना टर्नओवर वाले व्यापारी राज्य से लाइसेंस ले सकेंगे, पहले यह सीमा पांच करोड़ रुपये थी। इसके अलावा 50 करोड़ रुपये से अधिक के टर्नओवर पर ही केंद्र से लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा।
स्ट्रीट फूड वेंडर्स को भी मिली मुक्ति
नए प्रावधान के तहत नगर निगम या स्ट्रीट फूड वेंडर्स एक्ट-2014 में पंजीकृत वेंडर्स को अब एफएसएसएआई के अंतर्गत डीम्ड रजिस्टर्ड माना जाएगा। इससे उन्हें दो अलग-अलग विभागों में पंजीकरण और संभावित उत्पीड़न से मुक्ति मिलेगी। यह सभी नियम एक अप्रैल 2026 से लागू होंगे। जिन व्यापारियों के लाइसेंस की वैधता 31 मार्च 2026 तक है, उन्हें फिलहाल एक अंतिम बार नवीनीकरण कराना होगा।