इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1980 के जमीन विवाद से जुड़े मारपीट के 44 साल पुराने मामले में 90 वर्षीय बुजुर्ग मंगू को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने एक वर्ष की सजा घटाकर जेल में बिताई गई अवधि तक सीमित कर दी। साथ ही जमानत पर होने की स्थिति में उनकी जमानतदारियों को तत्काल मुक्त करने का आदेश दिया।
यह आदेश न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी की एकल पीठ ने दिया है। बिजनौर की चतुर्थ अपर सत्र अदालत ने छह आरोपियों को पांच या अधिक लोग मिलकर मारपीट और भीड़ के साथ मिलकर हत्या के प्रयास मामले में दोषी ठहराते हुए अलग-अलग सजाएं सुनाई थीं। अधिकतम सजा एक साल की थी। अपील लंबित रहने के दौरान पांच अपीलार्थियों ठाकुरी, केसरी, लेखा, भगवत सिंह और मेघा की मृत्यु हो गई। इससे उनके खिलाफ अपील समाप्त हो गई। इसके बाद मामला मंगू की अपील तक सीमित रह गया।
कोर्ट ने कहा कि अभियोजन के किसी गवाह ने मंगू पर किसी विशेष हथियार से हमला करने या किसी खास चोट के लिए जिम्मेदार ठहराने का आरोप नहीं लगाया। कोर्ट ने उनकी 90 वर्ष से अधिक आयु, बीमारियों और चार दशकों से चले आ रहे मानसिक तनाव को भी राहत का आधार माना। इन परिस्थितियों में अदालत ने अपील आंशिक रूप से स्वीकार कर सजा को भुगती अवधि तक सीमित कर दिया।