अल्पसंख्यक आयोग के दखल के बाद शुरू हुई थी पुनर्विवेचना
उचित धाराओं न लगाने पर तलब हुए थे तत्कालीन अधिकारी
जांच के बाद धाराएं बढ़ाने के लिए शासन से मांगी गई है अनुमति
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। वक्फ संपत्ति में अवैध निर्माण कराने को लेकर कोतवाली में दर्ज मामले की जांच को लेकर शुरू से ही सवाल उठते रहे हैं। उचित धाराओं में मुकदमा न दर्ज किए जाने की शिकायत मिलने पर राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने जिले के तत्कालीन अधिकारियों को तलब कर नाराजगी जताई थी। जिसके बाद दोबारा विवेचना शुरू हुई। जांच में शिकायत सही पाए जाने पर धाराएं बढ़ाने का निर्णय लिया गया, जिसकी अनुमति के लिए शासन को पत्र भेजा गया है।
मामला कोतवाली के पुराना जीटी रोड स्थित गुलाम हैदर त्रिपोलिया इमामबाड़े से संबंधित था जो वक्फ संपत्ति है। 2016 में मामला दर्ज होने पर कोतवाली में तैनात एसआई सर्वेश सिंह ने विवेचना शुरू की। इसी दौरान उनका तबादला होने के बाद विवेचना एसआई मोइनुद्दीन बेग को मिली। जिन्होंने विवेचना उपरांत तहरीर में लगाए गए आरोपों को सही पाया। साथ ही इस मामले में शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी के साथ ही इमामबाड़े के खुल्दाबाद रोशनबाग निवासी केयरटेकर की भी संलिप्तिता पाई। जिस पर दोनों के खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया।
बताया जाता है कि आरोपपत्र दाखिल होने के कुछ दिनोें बाद ही कुछ लोगों ने इस मामले से संबंधित एक शिकायत राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग में दर्ज कराई। इसमें आरोप लगाया कि इमामबाड़े का मूल स्वरूप बिगाड़कर धार्मिक भवनाएं भड़काने व वैमनस्यता फैलाने की भी कोशिश की गई। इसके बावजूद पुलिस ने उचित धाराएं नहीं लगाई। मामले में अल्पसंख्यक आयोग ने पुलिस प्रशासन के अफसरों को तलब कर नाराजगी भी जताई थी। साथ ही उचित धाराएं लगाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद मामले की पुनर्विवेचना शुरू हुई। दोबारा विवेचना के दौरान पाया गया कि आयोग में की गई शिकायतें सही थीं और आरोपियों के कृत्य से धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। जिसके बाद मामले में संबंधित धाराएं बढ़ाने का निर्णय लिया गया। कोतवाली पुलिस ने बताया कि इन धाराओं को बढ़ाने के लिए शासन की अनुमति जरूरी है, जिसके लिए पत्राचार किया गया है।
सवालों के घेरे में रही पुलिस, नहीं की कार्रवाई
प्रयागराज। इस मामलेे में तत्कालीन कोतवाली प्रभारी एमएम अंसारी की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में रही। दरअसल मुकदमा वादी आवास विकास परिषद के जेई सुधाकर मिश्रा ने दी गई तहरीर में आरोप लगाया था कि कई बार लिखित पत्राचार करने के बावजूद पुलिस ने मामले में उचित कार्रवाई नहीं की। तहरीर में कहा गया था कि मामले की जानकारी के बाद 11 दिसंबर 2015 को कोतवाल को अवैध निर्माण कार्य बंद किए जाने के लिए अधिकृत किए जाने के बाद भी कार्य बदस्तूर जारी रहा। इसके बाद परिषद अफसरों की ओर से पांच बार पत्र भेजकर निर्माण पर रोक लगाने की मांग की गई लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। यही नहीं 10 जून 2016 को तहरीर देने के बावजूद रिपोर्ट नहीं दर्ज की गई।