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अमेरिका नहीं, देश में ही हुनर दिखाएं इंजीनियरः डॉ.जोशी

Sun, 13 Oct 2019 01:31 AM IST
इलाहाबाद ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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Indian Institute of Information Technology - फोटो : CITY DESK
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तकनीकी क्षेत्र में देश अग्रणी बने, यही सोचकर ट्रिपलआईटी जैसे संस्थानों की स्थापना की गई थी। लेकिन आज इंजीनियर बनते ही छात्र अमेरिका जाने का सपना देखने लगते हैं, जबकि वे अपना हुनर दिखा अपने देश में ही सारी सुख सुविधाएं हासिल कर सकते हैं। यह बात भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने शनिवार को ट्रिपलआईटी झलवा में आयोजित समारोह में कही।
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डॉ. जोशी ने छात्रों से सवाल किया कि वे देश के लिए क्या कर रहे हैं? कहा, प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में प्रवेश मिलते ही छात्र की आत्मा अमेरिका चली जाती है और शरीर यहां रह जाता है। कोर्स पूरा होते ही शरीर भी आत्मा की खोज के लिए अमेरिका निकल जाता है। डॉ. जोशी ने कहा कि देश में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। जुगाड़ हमारे जीन में है। यहां छोटा सा छोटा मिस्त्री बड़ी से बड़ी मशीन ठीक कर लेता है। हम नकल करना नहीं जानते। इसके बावजूद हम केवल सॉफ्टवेयर बना पा रहे हैं। हार्डवेयर क्यों नहीं? हमें अपनी मौलिकता बचानी होगी और देश को आगे ले जाना है।

डॉ. जोशी ने टेक्नोलॉजी के जरिए वैदिक ज्ञान को सुरक्षित रखने पर जोर दिया। कहा, हमारे देशवासियों ने समझ लिया है कि जो वैदिक ज्ञान हमें मिला है, वह पर्याप्त है, लेकिन पश्चिम में ऐसा नहीं है। उन्होंने गंभीरता से इसका अध्ययन और सदुपयोग किया। डॉ. जोशी ने कहा कि यह विचित्र बात है कि वेद का नाम लेते ही धार्मिक, एंटी सेक्युलर होने का मुद्दा उठने लगता है। हमें टेक्नोलॉजी के जरिए वेद के ज्ञान का और बेहतर इस्तेमाल करना होगा। हिंदुस्तान के गांवों में तीन से चार करोड़ पांडुलिपियां बिखरीं पड़ी हैं। ये पांडुलिपियां पुराने कागजों, भोजपत्रों, ताड़पत्रों पर हैं। उन्हें डिजिटिलाइज किए जाने की जरूरत है, ताकि वे नष्ट न हों और हमारा ज्ञान भंडार सुरक्षित रहे। 
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ट्रिपलआईटी में अब ‘मुरली मनोहर मुक्तांगन’

प्रयागराज। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी) की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी को संस्थान में शनिवार को आयोजित एक भव्य समारोह में सम्मानित किया गया। इस मौके पर उनके नाम पर ‘मुरली मनोहर मुक्तांगन’ का लोकार्पण भी किया गया।

डॉ. जोशी ने भावुक अंदाज में कहा, उनके पास समय बहुत कम बचा है, लेकिन वह आने वाली पीढ़ी के लिए अच्छा करेंगे। डॉ. जोशी ने प्रोफेसर एमजीके मेनन के नाम पर गेट नंबर दो और प्रो. एआर वर्मा के नाम पर गेट नंबर एक समर्पित किया। प्रो. वर्मा ट्रिपलआईटी सोसाइटी के पहले अध्यक्ष थे। वहीं, स्वर्गीय प्रो. मेनन ने बोर्ड ऑफ  गवर्नर्स के अध्यक्ष के रूप में ट्रिपलआईटी के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस दौरान आल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल एजूकेशन के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय प्रो. एस. रामे गौड़ा की पत्नी सुशीला गौड़ा को सम्मानित किया गया। इसके बाद उनके पति के नाम पर रिंग रोड का लोकार्पण किया गया।

इसके अलावा अकादमिक कौंसिल के अध्यक्ष रहे चुके प्रो. एके गुप्ता को भी सम्मानित किया गया। ट्रिपलआईटी के निदेशक प्रो. पी. नागभूषण ने डॉ. जोशी का स्वागत करते हुए कहा कि यह गर्व का क्षण हैं, क्योंकि देश में आईटी शिक्षा की नींव इलाहाबाद में पड़ी। डॉ.माधवेंद्र मिश्र ने डॉ. जोशी के लिए मानपत्र पढ़ा। इस मौके पर प्रो. शिर्सू वर्मा, प्रो. शेखर वर्मा, प्रो. टी लहरी, प्रो. उमाशंकर तिवारी, प्रो. जीसी नंदी, प्रो. अनुपम अग्रवाल आदि मौजूद रहे। सम्मान समारोह के बाद सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें स्पिक मैके के दो कलाकारों अमित और असित गोस्वामी ने सितार-सरोद के साथ जुगलबंदी प्रस्तुत की।

डॉ. जोशी ने नहीं किया मुक्तांगन का लोकार्पण
- समारोह के दौरान ट्रिपलआईटी के निदेशक प्रो. पी. नागभूषण ने डॉ. जोशी के नाम पर ‘मुरली मनोहर मुक्तांगन’ का लोकार्पण करने के लिए जब डॉ. जोशी को आमंत्रित किया तो उन्होंने अपने ही नाम पर मुक्तांगन का लोकार्पण करने से इनकार कर दिया। डॉ. जोशी ने रिंग रोड और दोनों गेट का लोकार्पण किया, जबकि प्रो. एस. रामे गौड़ा की पत्नी ने मुक्तांगन का लोकार्पण किया।

ट्रिपलआईटी की स्थापना को लेकर कभी नहीं रहा विवाद
डॉ. जोशी ने कहा कि ट्रिपलआईटी की स्थापना को लेकर कभी कोई विवाद नहीं रहा। इसके लिए गठित टास्क फोर्स ने ही तय किया था कि ट्रिपलआईटी की स्थापना इलाहाबाद में की जाएगी। टास्क फोर्स ने निर्णय लिया था कि ट्रिपलआईटी उत्तर भारत के किसी शहर में बनाया जाएगा। इसके लिए वाराणसी, कानपुर और इलाहाबाद के नाम का प्रस्ताव था। कानपुर में आईआईटी और वाराणसी में बीएचयू में आईटी था, सो इलाहाबाद को चुन लिया गया। हालांकि लोगों ने मजाक में यह बात जरूर कही कि डॉ. जोशी मंत्री हैं, इसलिए उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र के लिए ट्रिपलआईटी को हड़प लिया।

डॉ. जोशी ने जारी किया विशेष आवरण
ट्रिपल आईटी की स्थापना के 20वें वर्ष के अवसर पर डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने डाक विभाग की ओर से तैयार किया गया विशेष आवरण जारी किया। इस मौके पर डॉ. जोशी ने प्रवर डाक अधीक्षक संजय डी अखाड़े, फिलेटलिक ब्यूरो के प्रभारी राजेश वर्मा और एम. गुलरेज को सम्मानित भी किया। विशेष आवरण की परिकल्पना एम. गुलरेज ने की है।

भौतिकी के शिक्षकों को सम्मेलन आज
डॉ. मुरली मनोहर जोशी 13 अक्तूबर को सुबह 10 बजे ट्रिपल आईटी झलवा में ‘इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजिक्स’ के 34वें वार्षिक कन्वेंशन-2019, और भौतिक विज्ञान एवं अनुसंधान में हालिया प्रगति और नवाचार पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन करेंगे। समन्वयक डॉ. अखिलेश तिवारी के अनुसार इसमें देश भर से भौतिकी के सैकड़ों शिक्षक शामिल होंगे।

Indian Institute of Information Technology- फोटो : CITY DESK

 

Indian Institute of Information Technology- फोटो : CITY DESK

 

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