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ट्रांसपोर्टरों पर लगाम लगाकर बढ़ाएंगे रजिस्ट्रेशन

Wed, 20 Jul 2016 01:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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जिला पंचायत की वसूली से खफा होकर ट्रांसपोर्टरों द्वारा खड़िया में हाईवे पर खड़े किए गए ट्रक।
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अपंजीकृत व्यापारियों को पंजीकरण के दायरे में लाने के लिए वाणिज्य कर विभाग ने नया रास्ता निकाला है। इसके लिए ट्रांसपोर्टरों पर लगाम लगाने की तैयारी है। मार्ग में जांच के दौरान अपंजीकृत व्यापारियों के माल से जुड़े प्रपत्रों में गड़बड़ी पर अर्थदंड की धनराशि एक लाख रुपये से अधिक होने पर ट्रांसपोर्टर ने अगर संबंधित व्यापारी का नाम, पता नहीं उपलब्ध कराया तो उसे ही व्यापारी मानते हुए पंजीकृत किया जाएगा। इसके अलावा निर्माणाधीन भवनों में कार्यरत ठेकेदार और आपूर्तिकर्ताओं  पर भी सख्ती की तैयारी है। उनसे सूचना प्राप्त कर अपंजीकृत आपूर्तिकर्ताओं का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा।
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अन्य प्रदेशों के मुकाबले उत्तर प्रदेश में पंजीकृत व्यापारियों की संख्या बेहद कम है। गुजरात में प्रति हजार जनसंख्या पर 7.57, कर्नाटक में 8.89, उत्तराखंड में 8.51 पंजीकृत व्यापारी हैं, जबकि यूपी में प्रति हजार जनसंख्या पर मात्र 3.54 पंजीकृत व्यापारी हैं। यूपी में काफी व्यापारी ऐसे हैं, जिन्होंने खाद्य सुरक्षा विभाग में तो पंजीकरण कराया लेकिन वाणिज्य कर विभाग में नहीं। मुख्यालय ने सभी जोनल कार्यालयों को खाद्य सुरक्षा विभाग का डाटा उपलब्ध कराया है, ताकि उसके आधार पर भी पंजीकरण बढ़ाया जा सके।

वाणिज्य कर कमिश्नर मुकेश मेश्राम ने सोमवार को आदेश जारी कर ट्रांसपोर्टरों, ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं पर सख्ती करने को कहा है। उन्होंने कहा है कि प्रवर्तन इकाइयां अपंजीकृत व्यापारियों के संबंध में जमा कराए जाने वाले अर्थदंड पर अभिग्रहण की धनराशि एक लाख रुपये से अधिक होने पर कन्साइनी(व्यापारी) का रजिस्ट्रेशन नंबर तथा उसका पूर्ण पता उपलब्ध न कराने की स्थिति में ट्रांसपोर्टर को व्यापारी मानते हुए पंजीकृत करें।
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कर चोरी से माल मंगाने के लिए अपंजीकृत व्यापारी ट्रांसपोर्टरों से मिलकर खेल करते हैं। वाणिज्य कर विभाग में ट्रांसपोर्टरों का पंजीकरण अनिवार्य नहीं है सो अपंजीकृत व्यापारी का माल जांच में पकड़े जाने पर ट्रांसपोर्टर उसे अपना बताकर अर्थदंड जमा कर देते हैं और बाद में संबंधित व्यापारी से अर्थदंड की रकम ले लेते हैं। हालांकि वैट लागू होने पर ट्रांसपोर्टरों को भी पंजीकरण के दायरे में लाने की तैयारी थी लेकिन इसके विरोध में उन्होंने हड़ताल कर दी, जिसकी वजह से तत्कालीन सरकार को ट्रांसपोर्टरों को विभाग में पंजीकरण की अनिवार्यता से बाहर कर दिया गया।
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