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महंगाई दर घटी, महंगाई नहीं
0 सरकारी आंकड़ों से जनता को नहीं है कोई फायदा
इलाहाबाद। लोकसभा चुनाव में महंगाई को मुद्दा बनाकर सत्ता में पहुंची मोदी सरकार के कार्यकाल में महंगाई दरों को काबू में कर दिया लेकिन सच्चाई यह है कि महंगाई में कोई कमी नहीं आई। सरकारी आंकड़ेबाजी में थोक महंगाई दर शून्य फीसदी पर आ गई। इससे जनता में भ्रम है कि उसके खाने-पीने की चीजें भी सस्ती हो रही हैं। अर्थशास्त्र के जानकारों का दावा है कि शून्य महंगाई दर का मतलब सिर्फ इतना है कि पिछले साल की अपेक्षा महंगाई में बढ़ोतरी नहीं हुई। पिछले नवंबर में जिस रेट पर वस्तुएं मिल रही थीं, दाम वहीं स्थिर हो गए हैं। आशय साफ है कि पिछली यूपीए सरकार में जनता महंगी दर पर खाने-पीने की चीजों को खरीद रही थी तो अब भी उतनी ही रकम देनी पड़ रही है।
नवंबर, दिसंबर और जनवरी में हरी सब्जियों की आवक बढ़ती है। हरी सब्जी व्यापार मंडल के अध्यक्ष सतीश कुशवाहा कहते हैं कि इलाहाबाद और आसपास के जिलों से मटर, आलू, टमाटर, गोभी, पालक, गाजर, धनिया जैसी हरी सब्जियों की अच्छी आवक है। इसलिए कीमतें गिरी हैं लेकिन इनकी तुलना पिछले साल की कीमतों से करें तो कोई फर्क नहीं है। सबके दाम वही हैं। ऐसे में महंगाई घटने की बात हजम नहीं हो रही है।
सरकार कोई भी दावा करे लेकिन स्थानीय बाजार में मई-जून की अपेक्षा अरहर दाल, सरसों तेल, बेसन, रिफाइंड, आटा के दाम बढ़ गए। आढ़ती सुभाष केसरवानी के मुताबिक नई सरकार बनने के बाद अरहर दाल तीन सौ रुपये बढ़कर 7400-7500 रुपये प्रति क्विंटल, सरसों तेल 8200 से बढ़कर 8500 रुपये क्विंटल, आटा 100 रुपये बढ़कर 1750 रुपये और बेसन 4800 से बढ़कर 5000 रुपये क्विंटल बिक रहा है। चीनी के दाम सीजन के कारण थोड़े गिरे हैं। फुटकर कीमतों में भी इसी अनुपात में बढ़ोतरी हुई है। काबुली चना फुटकर में 70-75 रुपये प्रति किग्रा के नीचे नहीं आ रहा है। फुटकर में अरहर दाल 80, आटा 20, चीनी 34, चना दाल 48, तेल 95, गुड 40 रुपये में है।
डीजल के दामों में बढ़ोतरी के बाद ट्रकों, टेंपो और बसों के किराये बढ़ा दिए गए लेकिन डीजल के दाम 10 रुपये प्रति लीटर तक कम हो जाने के बाद भी किसी ने फूटी-कौड़ी कम नहीं की है। रोडवेज ने सिर्फ एक रुपये कम किए। बाकी, बढ़ा भाड़ा ही वसूल रहे हैं। रोचक यह है कि बड़ी कंपनियों ने ट्रकों के किराये में कमी कर दी लेकिन अपने उत्पादों के दाम नहीं घटाए। ट्रक मालिक खाद्यान्न, हरी सब्जियों, आलू, प्याज की ढुलाई के भाड़े में कोई कमी नहीं कर रहे हैं। फतेहपुर से 10 टन माल का भाड़ा 4500 रुपये मई में था, अब भी है। नागपुर से इलाहाबाद के लिए 180 रुपये प्रति क्विंटल मालभाड़ा ट्रक आपरेटर वसूल रहे हैं। सरकार की ओर से मिले फायदा को अकेले डकार रहे हैं। उधर, टैंपो-टैक्सी यूनियन के अध्यक्ष विनोद चंद्र दुबे का कहना है कि रविवार को किराये पर चर्चा होनी तय है।
महंगाई दर 600-700 वस्तुओं के आधार पर तय होती है। थोक महंगाई दर शून्य होने का आशय है कि पिछले साल दिसंबर में जो महंगाई थी, वही इस समय है। पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से मालभाड़ा बढ़ता है जिसका असर खुदरा दर पर पड़ता है। अगस्त से अब तक पेट्रोल करीब 12 रुपये और डीजल 10 रुपये कम हुआ लेकिन ऑटो, बस के किराये नहीं घटे। जिम्मेदार सरकार के तौर पर केंद्र सरकार को रेल व मालभाड़ा और यूपी सरकार को बसों का किराया घटाना चाहिए। बडे ट्रांसपोटर्स पर मालभाड़े में कमी के लिए सरकारी तंत्र पर दबाव बनाया जाना चाहिए। डीजल के दामों में कमी का पूरा फायदा निजी हाथों में जा रहा है। केंद्र और राज्य की सरकारें ट्रांसपोर्टर्स पर दबाव बनाएं तो मालाभाड़ा की दरें कम होने का फायदा आम जनता को मिले।
0 प्रोफेसर प्रहलाद कुमार
विभागाध्यक्ष, अर्थशास्त्र विभाग, इविवि