हाईकोर्ट ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर और प्रोफेसर के 517 पदों की नियुक्ति पर अगली सुनवाई तक के लिए रोक लगा दी है। कोर्ट ने इस मामले में विश्वविद्यालय, यूजीसी और अन्य पक्षकारों से चार सप्ताह में जवाब तलब किया है। जगदीश वर्मा और चार अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति रणविजय सिंह और न्यायमूर्ति इफाकत अली खान की पीठ ने यूजीसी को नियुक्ति में आरक्षण लागू करने के लिए गाइड लाइन तय करने तथा रोस्टर तैयार करने का निर्देश दिया है।
याचिका में 14 अप्रैल 2017 को जारी विज्ञापन को चुनौती दी गई है। विज्ञापन में 303 सहायक प्रोफेसर, 147 सहयोगी प्रोफेसर और 67 प्रोफेसर की नियुक्ति के लिए आवेदन मांगे गए हैं। याची का कहना है कि नियुक्ति में हाईकोर्ट द्वारा बीएचयू के केस में दिए गए निर्णय के अनुसार आरक्षण लागू नहीं किया जा रहा है। कोर्ट ने विभागवार आरक्षण लागू करने का निर्देश दिया है, न कि पूरे रिक्त पदों पर एक साथ।
विश्वविद्यालय ने कोर्ट के आदेश के बाद यूजीसी से इस बाबत गाइड लाइन और रोस्टर तैयार करने का अनुरोध किया है, मगर अभी तक कोई गाइड लाइन तय नहीं हुई है। इसलिए मौजूदा विज्ञापन के तहत नियुक्ति नहीं की जानी चाहिए। याची ने विज्ञापन रद्द कर नया विज्ञापन जारी करने की मांग की है। कोर्ट ने सभी पक्षकारों को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में जवाब तलब किया है तथा अगली सुनवाई तक विज्ञापन के संबंध में कोई नियुक्ति नहीं करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यूजीसी से कहा है कि गाइड लाइन तय नहीं होने के कारण तमाम पदों पर नियुक्तियोें में बाधा आ रही है, जिससे शैक्षणिक कार्य को आगे बढ़ाने में मुश्किल होती है इसलिए यूजीसी तीन माह में गाइड लाइन तैयार कर ले।