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किताबों में दिए गलत तथ्यों की भेंट चढ़ती रही भर्ती परीक्षाएं

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उत्तर प्रदेश में शिक्षक भर्ती परीक्षाएं और शिक्षक पात्रता परीक्षाएं लगातार गलत प्रश्नों और उनके एक से अधिक उत्तर की भेंट चढ़ती रही हैं। अधिकतर एनसीईआरटी और एससीईआरटी तथा उसी स्तर पर निजी प्रकाशन की पुस्तकों में तथ्य अलग होना विवादों की वजह बना।
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प्रदेश में प्राथमिक स्कूलों में भर्ती के लिए परीक्षा नियामक प्राधिकारी, माध्यमिक विद्यालयों के लिए उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड एवं डिग्री कॉलेजों के लिए उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग भर्ती परीक्षाएं कराता रहा है। इन परीक्षाओं के साथ ही प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) का आयोजन भी परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय के जिम्मे है। अधिकतर परीक्षाओं के बाद एक नहीं एक साथ 10 से 15 प्रश्नों को लेकर परीक्षार्थियों की आपत्ति उठती रही है और बाद में मामला कोर्ट चला जाता है। परीक्षा नियामक प्राधिकारी की ओर से टीईटी 2017 को लेकर सबसे अधिक विवाद रहा। परीक्षार्थियों की ओर से 17 प्रश्नों पर आपत्ति उठाई गई। प्रश्नों पर आपत्ति के बाद यह मामला कोर्ट में चला। कोर्ट के आदेश पर विशेषज्ञों की टीम ने जब अपना निर्णय सुनाया तो उसमें एक प्रश्न के दो उत्तर होने पर परीक्षा कराने वाली संस्था के उत्तर को सही मानकर परीक्षार्थियों की आपत्ति को निरस्त कर दिया। इसी प्रकार का विवाद 2018 टीईटी को लेकर उठा और टीईटी 2019 को लेकर अभी विवाद कोर्ट में विचाराधीन है। परीक्षा नियामक की ओर से सबसे अधिक विवाद तो 2018 में हुई 68500 शिक्षक भर्ती को लेकर हुआ। तत्कालीन सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी डॉ. सुत्ता सिंह पर परीक्षा में अनियमितता को लेकर गंभीर आरोप लगे और उन्हें इस मामले में निलंबित तक कर दिया गया। 2018 में हुई 68500 शिक्षक भर्ती में पहली बार ऐसा हुआ जब ओएमआर का मूल्यांकन मैनुअल किया गया। कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद बाद में हुए मूल्यांकन में पांच हजार अभ्यर्थियों को सफलता मिली।
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