माफिया अतीक के करीबी सफदर अली के एसएसए गन हाउस में बृहस्पतिवार को जांच की गई। सिटी मजिस्ट्रेट और एसीपी कोतवाली के नेतृत्व में टीम ने गन हाउस के तमाम अभिलेखों को जब्त कर लिया गया। गन हाउस के खुलने से लेकर अब तक कितने कारतूस बेचे गए। कारतूसों को खरीदने वालों से भी पुलिस पूछताछ करेगी कि उन्होंने इसका प्रयोग कहां किया। सिटी मजिस्ट्रेट का कहना है कि अभिलेखों की जांच में कुछ दिन लगेंगे।
उमेश पाल हत्याकांड के बाद चकिया के रहने वाले सफदर अली का घर बुलडोजर से ढहा दिया गया था। सफदर का विवेकानंद मार्ग पर एसएसए गन हाउस है। उसके गन हाउस में ही अतीक के परिवार के तीन असलहे जमा किए गए थे। पुलिस को पता चला था कि सफदर के गन हाउस से पिछले कुछ सालों में भारी संख्या में कारतूसों को बेचा गया है। आशंका जताई गई कि इन कारतूसों का प्रयोग अतीक गैंग ने विभिन्न वारदातों को अंजाम देने के लिए किया गया।
बृहस्पतिवार को सिटी मजिस्ट्रेट सत्यप्रिय सिंह और एसीपी कोतवाली सत्येंद्र तिवारी टीम के साथ एसएसए गन हाउस पहुंचे। टीम ने चार घंटे तक अभिलेखों की जांच की। दुकान से कितने कारतूस बेचे गए? किन किन लोगों की बंदूकें जमा हैं? किन लोगों को कारतूस दिए गए। इसमें ऐसे भी नाम थे, जो बेहद सामान्य लोग हैं, लेकिन उनके नाम से सौ से दो सौ कारतूस दर्ज हैं। उन सभी के नाम और मोबाइल नंबर पुलिस ने लिए हैं। सबसे पूछा जाएगा कि उन्होंने कारतूस कहां खर्च किए गए। बंदूकों का भी हिसाब किताब लिया गया।
यह भी पूछा गया कि जिन लोगों ने बंदूकें जमा की हैं, उन्होंने कुछ दिन के लिए असलहे वापस तो नहीं लिए थे। सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि टीम ने रूटीन जांच की है। प्रारंभिक जांच में पता चला कि गन हाउस से बड़ी संख्या में कारतूसों को बेचा गया है। अभिलेखों को जब्त कर लिया गया है। जांच कराई जाएगी, इसके बाद ही कोई कार्रवाई की जाएगी। उधर, सफदर का कहना है कि उसके रिकार्ड पूरी तरह दुरुस्त हैं। जिस लाइसेंस धारक को जितने कारतूस अनुमन्य हैं, उन्हें उतने ही बेचे गए हैं। किसी को अधिक या कम कारतूस बेचने का सवाल ही नहीं उठता।