पंचम दा को समर्पित बज़्म -ए- विरासत की आखिरी और अंतिम निशा आरडी बर्मन की कंपोज फिल्म शोले की थीम म्यूजिक पर केंद्रित रही। पंचम को सुरों से श्रद्धांजलि किशोर शोधा और उनकी टीम ने "दो नैनों में एक कहानी, थोड़ा सा बदल, थोड़ा सा पानी" जैसे प्रतिष्ठित गीत से अर्पित की। धवल के सुरमई और मधुर संगीत ने दर्शकों को बांधे रखा।
सुर, लय, ताल का समागम शनिवार को हर किसी के लिए यादगार बन गया। आरडी बर्मन नाइट में संगीत प्रेमियों से खचाखच भरी दर्शक दीर्घा में लोग कभी खड़े होकर थिरकते नजर आए तो कभी सुर मिलाकर मुग्ध होते रहे। दो नैनों में एक कहानी, थोड़ा सा बादल थोड़ा सा पानी...लेकर हम दीवाना दिल फिरते हैं मंजिल -मंजिल...तुमसे नाराज नहीं जिंदगी हैरान हूं मैं.. जैसे फिल्मी नग्मों की स्वरलहरियों ने शनिवार की रात इसी तरह हर दिल को सराबोर किया।
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पंचम को समर्पित बज़्म -ए- विरासत की आखिरी और अंतिम निशा आरडी बर्मन की कंपोज फिल्म शोले की थीम म्यूजिक पर केंद्रित रही। पंचम को सुरों से श्रद्धांजलि किशोर शोधा और उनकी टीम ने "दो नैनों में एक कहानी, थोड़ा सा बदल, थोड़ा सा पानी" जैसे प्रतिष्ठित गीत से अर्पित की। धवल के सुरमई और मधुर संगीत ने दर्शकों को बांधे रखा।
संगीत रसिकों की तालियां लगातार गूंजती रहीं।एक खास पल वह था जब पंचम दा को 1973 के लोकप्रिय गीत रात बाकी बात बाकी... के माध्यम से याद किया गया । ट्रंपेट की गूंज ने एक ऐसा अहसास दिलाया मानो पंचम भी कहीं न कहीं यह प्रस्तुति देखकर मुस्कुरा रहे हों। इस सुरमई संध्या ने सभी के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी। बाहों में आजा रे ... की धुन पर लोग कुर्सियों से उठकर खूब झूमते-नाचते रहे।