सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान के संचालकों को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। हाईकोर्ट ने मामले में मजिस्ट्रेट द्वारा 25 नवंबर 2019 को पारित आदेश को सही ठहराया है। साथ ही मेरठ के जिला आपूर्ति अधिकारी द्वारा दिए गए दुकान लाइसेंस रद्दीकरण के आदेश में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने अवधेश कुमार सहित 104 याचिकाओं को खारिज करते हुए दिया है। कोर्ट सभी मामलों पर एक साथ सुनवाई कर रही थी।
मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से जिला आपूर्ति अधिकारी के सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान को निरस्त किए जाने के आदेश को चुनौती दी गई थी। दुकान संचालकों पर आरोप है कि उन्होंने एक ही आधार कार्ड पर दर्जनों नामों से राशन का वितरण कर दिया। मेरठ में 2017 में इस तरह से चार हजार मामले सामने आए थे। इसी तरह के और मामले पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई अन्य जिलों में पाए गए।
मेरठ में जांच के बाद आरोप सही पाने पर जिला आपूर्ति अधिकारी ने दुकानों के लाइसेंस रद्द कर दिए थे। याचिकाकर्ताओं की ओर से पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी, विभु राय सहित अन्य अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि यह गड़बड़ी याचिकाकर्ताओं की तरफ से नहीं की गई है।
क्योंकि, ई-पॉश मशीन से केवल डेटा फीडिंग किया जाता है, उसमें कोई बदलाव उनके द्वारा नहीं किया जा सकता है। डेटा में परिवर्तन विभाग द्वारा ही किया जा सकता है। इसलिए याचिकाकर्ताओं को उत्तरदायी नहीं बनाया जा सकता है। कोर्ट ने पाया कि डेटा सक्षम प्राधिकारी के द्वारा प्रमाणित किए जाने के बाद ही लॉक हो सकता है।