सपा के मुखिया रहे मुलायम सिंह यादव की विश्वासपात्र समाजवादी महिला सभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रंजना बाजपेयी को भाजपा से उम्मीदवार बेटे हर्ष वर्धन बाजपेयी के लिए प्रचार करना महंगा पड़ गया। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया। कांग्रेस से जुड़ीं रंजना बाजपेयी वर्ष 1995 में महापौर का चुनाव लड़ने के बाद सपा में शामिल हुई थीं। दो साल पहले ही उन्हें मुलायम ने राज्यमंत्री का दर्जा देते हुए सपा महिला सभा की कमान सौंपी थी।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्राचीन इतिहास विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. रंजना बाजपेयी कांग्रेस की वरिष्ठ नेता रहीं डॉ. राजेंद्र कुमारी बाजपेयी की बहू हैं। उनके पति अशोक बाजपेयी पूर्व विधायक रहे। डॉ. रंजना के पुत्र हर्ष वर्धन बाजपेयी पिछले दो विधानसभा चुनाव बसपा के टिकट पर लड़ चुके हैं। कम मतों से हुई हार के बाद कुछ महीने पहले भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद हर्ष भाजपा में शामिल हो गए। इसके बाद भाजपा ने हर्ष को शहर उत्तरी से प्रत्याशी घोषित कर दिया।
बेटे ने बसपा से चुनाव लड़ा तब भी रंजना सपा में ही रहीं। उनके पास पद भी था। इस बार सपा में मुलायम के अध्यक्ष पद से हटते ही जिन लोगों से लाल बत्ती छीनी गई, उसकी सूची में रंजना का नाम नहीं था। मंगलवार को मु्ख्यमंत्री अखिलेश यादव के शहर में रोड शो के दौरान उनकी अनुपस्थिति को विरोधियों से अनुशासनहीनता बताकर पार्टी के लिए नुकसानदायक बताया। इस बीच अल्लापुर पुलिस चौकी के पास भाजपा के रोड शो को दौरान खींची गई डॉ. रंजना की एक फोटो वायरल हो गई। यह उनके खिलाफ कार्रवाई का आधार बन गई। सपा जिलाध्यक्ष कृष्णमूर्ति सिंह यादव के मुताबिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सपा महिला सभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रंजना बाजपेयी को विस चुनाव में पार्टी प्रत्याशियों के विरोध में कार्य करने, अनुशासनहीन आचरण और पार्टी विरोधी अन्य कार्यों के लिए सपा से निष्कासित कर दिया है। सपा के मीडिया प्रभारी दान बहादुर मधुर ने बताया कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम ने इस बारे में पत्र जारी कर दिया है, जो पार्टी कार्यालय में शाम को ही फैक्स से आया है।