बेरौनक ही रहा सिविल लाइंस का रामदल
0 बस, पूरी हुई परंपरा लेकिन दोनों प्रमुख सड़कों पर नहीं रही रोशनी
प्रयागराज। प्रशासन के आश्वासन के बाद शुक्रवार को सिविल लाइंस में रामदल निकालने की बस परंपरा पूरी की गई। इसके साथ परंपरा टूटने से भले ही बच गई लेकिन पहली बार बिना बाजा और बिना रोशनी सिविल लाइंस का रामदल एकदम फीका और बेरौनक रहा।
हाईकोर्ट हनुमान मंदिर से आरंभ रामदल सुभाष चौराहे पर पहुंचकर बायीं ओर मुड़कर यात्रिक चौराहे से आगे विवेकानंद मूर्तिस्थल तक जाकर विसर्जित हो गया। हाईकोर्ट हनुमान मंदिर पर मंदिर के पुजारी अखिलेश मिश्र के आचार्यत्व में कमेटी के अध्यक्ष विनोद चंद्र दुबे ने राम और लक्ष्मण का आरती-पूजन करकेदल को रवाना किया। दल के साथ रामकथा के विविध प्रसंगों पर आधारित दर्जन भर से ज्यादा चौकियां भी शामिल रहीं। व्यवस्था के लिए सुभाष चौराहे के पास ही लाउडस्पीकर लगा।
इससे पहले सुभाष चौराहे पर होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष सरदार जोगिंदर सिंह की ओर से देवी दुर्गा, हनुमान, गणपति और शिव के विशाल कटआउट्स लगाए गए थे। यहां सांसद केशरीदेवी पटेल, महापौर अभिलाषा गुप्ता, विधायक हर्षवर्धन वाजपेयी, डीएम भानुचंद्र गोस्वामी, डीआईजी केपी सिंह, एसपी सिटी ब्रजेश श्रीवास्तव ने पूजन-अर्चन करके मेले का उद्घाटन किया। अबकी आनन-फानन में राम का विशाल कटआउट नहीं लगाया गया था।
पहले दल न निकालने और दोपहर बाद दल निकालने के फैसले से अबकी रामदल पर सिविल लाइंस में होने वाली रौनक और चहल-पहल नहीं रही। हाईकोर्ट हनुमान मंदिर से लेकर तुलसी चौराहा और केंद्रीय रेल विद्युतीकरण चौराहे से लेकर विवेकानंद चौराहे तक का क्षेत्र बिजली की झालरों से सजता, जगमगाता था, अबकी सिर्फ हाईकोर्ट हनुमान मंदिर के करीब आंबेडकर प्रतिमा से लेकर पत्थर गिरजाघर तक ही रोशनी की गई थी। रामलीला मंचन स्थल के सामने पहले से ही रोशनी थी।
संयोजन इंदर मध्यान और संचालन रघुनाथ द्विवेदी ने किया। दल और पूजन में सिविल लाइंस व्यापार मंडल के अध्यक्ष सुशील खरबंदा, महामंत्री शिवशंकर सिंह सहित विदुप अग्रहरि, बलवीर कोहली, संजय गुप्ता, संजीव अग्रवाल, संजीव जैन, राजेश अग्रवाल, सरदार जोगिंदर सिंह, महंत लाल यादव, आशीष अरोरा, गुरदीप सिंह, प्रदीप कुमार, विशाल कनौजिया आदि शामिल थे।
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पटरियों पर लगे बच्चों के लिए झूले, खाने-पीने की दुकानें
सिविल लाइंस के रामदल के मद्देनजर हाईकोर्ट हनुमान मंदिर, हर्ष होटल, पैलेस सिनेमा, मैक्स, सुभाष चौराहे सहित सड़क के दोनों ओर बच्चों के लिए तरह-तरह के झूले लगे और खान-पान की दुकानें भी सजीं। इसमें दो सीटर, चार सीटर झूला, जंपिंग, बाउंसी, पटरियों पर दौड़ती ट्रेन सहित मनोरजंक खेल शामिल थे। हालांकि भीड़ न होने की वजह से कारोबारियों में जबर्दस्त निराशा रही। पैलेस के सामने खुल्दाबाद के दीपू अग्रहरि ने झूलों सहित जंपिंग लगा रखा था। होटल हर्ष के पास फतेहपुर से आए पुत्तन सिंह ने भी झूले लगाए थे लेकिन बिक्री न होने से मायूस रहे। बोले, भाड़ा और लोगों की खुराकी तक का पैसा नहीं निकल सका।