सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार क ो विश्व हिंदू परिषद के संत सम्मेलन-धर्मसभा में राम मंदिर का नाम नहीं लिया लेकिन ‘बिना मांगे मिलेगा’ का भरोसा दिलाया। कहा, संतों के आशीर्वाद से केंद्र में ऐसी सरकार बनी है, जिसने दुनिया में देश का नाम बढ़ाया है। मोदी सरकार ने पहले बिना मांगे योग को अंतर्राष्ट्रीय दर्जा दिलाया और फिर यूनेस्को की धरोहर में कुंभ शामिल हो गया। ऐसे में जब बिना मांगे ही काम हो रहे हों, तो बाकी के सारे काम भी अपने आप होंगे।
संतों को उम्मीद थी कि योगी राम मंदिर निर्माण के बारे में कोई पहल, प्रस्ताव या घोषणा करेंगे, लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया। हालांकि, इसी मुद्दे के ईद-गिर्द वह बोलते रहे। योगी ने नसीहत दी, संतों को मांगना नहीं चाहिए। प्रदेश की जनता ने संतों पर भरोसा करते हुए सत्ता सौंपी है, अब उन्हें जिम्मेदारी और जवाबदेही निभानी होगी। संत गौ रक्षा का दायित्व लेते हुए गायों को बूचड़खाने में जाने से बचाएं। गौरक्षा के लिए समाज केंद्रित व्यवस्था जरूरी है। देश में बारह लाख संत हैं। वे गौ संरक्षण की पहल करें। प्रदेश सरकार हर जिले में गौशाला स्थापित करेगी, यहां गौ की भारतीय नस्लों के सुधार पर भी ध्यान दिया जाएगा।
सीएम ने कहा कि सरकार दिव्य कुंभ के लिए कटिबद्ध है। कुंभ मेले के कार्यों की निगरानी के लिए संतों की एक कमेटी बनाई जाएगी। सफाई, शौचालय जैसी व्यवस्था अबकी माघ मेले में दिखी है, कुंभ मेले में इससे भी अच्छी व्यवस्था होगी। गंगा और उसकी सहायक नदियों की अविरलता-निर्मलता के लिए प्रधानमंत्री ने पहले ही बीस हजार करोड़ रुपये की योजनाओं की घोषणा कर दी है। उन्होंने सामाजिक विघटन को रोकने सहित समाज में फैली जातिगत जड़ता तोड़ने के लिए फिर संतों का आह्वान किया। कहा, देश में छह लाख से ज्यादा गांव हैं और तकरीबन हर गांव में संत रहते हैं। ऐसे में वह अपनी जगह रहकर समाज को जोड़ने के लिए जागृति फैलाएं। स्वामी विवेकानंद की तरह राष्ट्रधर्म अपनाएं। प्रदेश सरकार ने न किसी के साथ भेदभाव और न ही अन्याय किया है, लेकिन किसी का तुष्टिकरण भी नहीं किया।
संतों से मुखातिब होते हुए योगी ने उन्हें कुंभ में सहयोग की जिम्मेदारी सौंपी। कहा, तकरीबन बारह करोड़ श्रद्धालुओं के स्वागत में संतों को जुटना पड़ेगा। कुंभ केवल जमावड़ा बनकर न रह जाए, दुनिया भर के श्रद्धालुओं के बीच उसका महत्व बताएं। ‘जयश्री राम’ के साथ अपनी बात पूरी करने से पहले योगी ने फिर इशारों में कहा, कार्य करें, घोषणा नहीं।
सम्मेलन में बतौर अध्यक्ष स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने इलाहाबाद के प्रवेश मार्गों का नामकरण संतों-महापुरुषों के नाम पर करने को कहा। इसी तरह इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करने का सुझाव भी दिया गया, जिस पर योगी मुस्कुरा दिए। राम जन्मभूमि मंदिर न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ने भरोसे से कहा, मंदिर निर्माण का समय नजदीक आ गया है। एक ओर योगी और दूसरी ओर मोदी की सरकार है, ऐसे में मंदिर अब नहीं तो कब बनेगा। उन्होंने सरयू की निर्मलता का मुद्दा भी उठाया। डॉ.रामकमल दास वेदांती बोले, अब संतों ने राम मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी सरकारों पर सौंप दी है।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने संतों, कल्पवासियों से अपील की कि वे अपनी जप, तप की शक्ति योगी जी को सौंप दें, ताकि वह अपने संकल्पों को पूरा कर सकें। स्वामी चिन्मयानंद ने कहा, अब विधानसभा और संसद, संतों के हितों का प्रस्ताव पारित करेगी। योगी जी सात्विक ऊर्जा का दान मांगने आए हैं, संत उन्हें सहयोग करें। राघवाचार्य, रामेश्वर दास वैष्णव ने भी अपनी बात रखी। संत संपर्क प्रमुख अशोक तिवारी ने संचालन और विहिप महामंत्री चंपत राय ने स्वागत किया।