विश्व हिंदू परिषद की ओर से आयोजित संत सम्मेलन में चंद संतों को ही बोलने का मौका मिला। जिन्हें बोलने का मौका तो उन्हें भी अपनी बातें बेहद कम समय में रखनी पड़ी। हालांकि इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ उनके मंत्रियों ने संतों का स्वागत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। एक बारगी वहां यही लगा कि विहिप की ओर से संत सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है या सम्मान समारोह।
दिन में 2.22 बजे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सम्मेलन में पहुंचे। उनके यहां पहुंचते मंच का संचालन विहिप पदाधिकारी अशोक तिवारी ने कहा कि सीएम यहां पहले संतों का सम्मान करेंगे। इस दौरान सीएम ने वहां मंच पर मौजूद हर एक संत को शॉल उढ़ाकर सम्मानित किया। उनके साथ डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने संतों का माल्यार्पण किया। इस दौरान कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, सिद्धार्थ नाथ सिंह ने भी संतों को सम्मानित किया। अधिकांश संतों को भगवा शॉल ही भेंट किए गए। बाद में कुछ संतों को सफेद शॉल बांटे जाने लगे तो मंच से विहिप के अंतर्राष्ट्रीय महामंत्री चंपत राय ने कहा कि संतों के लिए और भगवा शॉल मंगवा लिए जाए जो शिविर में रखे हुए हैं। चंपत राय ने बताया कि पूर्व में संतों ने सीएम योगी का सम्मान करने की बात कही थी, लेकिन योगी ने कहा कि संत नहीं बल्कि वे संतों का सम्मान करेंगे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विहिप के संत सम्मेलन पहुंचे तो उन्होंने मंच पर बैठे हर एक संत का अभिवादन किया। वे मंच पर बैठे हर एक संत के पास गए और हाथ जोड़कर उन्हें नमस्कार भी किया। इस दौरान जब वे स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती के पास पहुंचे तो वहां उन्होंने झुककर उन्हें प्रणाम किया। वहां वासुदेवानंद से उन्होंने कुछ बात भी की। बाद में वे महंत नृत्य गोपाल दास से मिलते हुए पीछे की पंक्ति में बैठे संतों से मिलने चले गए। इसके पूर्व डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने मंच पर मौजूद हर एक संत का चरण स्पर्श कर आर्शीवाद लिया। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने उनके कान में भी कुछ कहा। केशव के बाद नंदी और सिद्धार्थनाथ सिंह ने भी संतों का आर्शीवाद लिया।
विश्व हिंदू परिषद की ओर से आयोजित संत सम्मेलन में योगी जैसे ही पहुंचे तो उनका स्वागत विहिप कार्यकर्ताओं ने पुष्प वर्षा करके किया। शिविर में सीएम का आगमन दिन में 2.22 बजे हुआ। शिविर में आने के बाद सीएम योगी मंच पर जाने की बजाय सीधे एक स्विज कॉटेज में चले गए। वहां वे तकरीबन 26 मिनट तक रहे। इसके बाद वे 2.48 बजे संत सम्मेलन के मंच पर पहुंचे। उनके आने के पूर्व विहिप के अंतर्राष्ट्रीय महामंत्री चंपत राय, अयोध्या से आए स्वामी राधवाचार्य जी महाराज, ऋषिकेश के रामेश्वर दास जी महाराज का उद्बोधन हो चुका था। जिस वक्त योगी मंच पर पहुंचे उस समय जूना अखाड़े के महंत प्रेम गिरि संतों को संबोधित कर रहे थे। प्रेम गिरि के बाद स्वामी चिन्मियानंद , अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि, डा. राम कमल दास वेदांती, नृत्य गोपाल दास जी महाराज ने संतों को संबोधित किया। दिन में 3.40 बजे सीएम ने माइक संभाला। शाम 4.09 बजे योगी ने जय श्री राम के उद्घोष के साथ अपनी वाणी को विराम दिया।