रंग-बिरंगी कांवड़ के साथ ही ध्वजा-पताकाओं से सजे वाहनों से भोलेभक्त यहां पहुंचने लगे हैं। जल भरने के साथ ही तीर्थपुरोहितों की चौकियों पर संकल्प लेकर भक्त बाबा धाम के लिए रवाना हुए। कोई नौकरी की कामना लेकर बाबा के दरबार में हाजिरी लगाने निकला है तो कोई अच्छी खेती और बिटिया की अच्छे परिवार में शादी की मनौती लेकर। तीर्थपुरोहित छोटे मिश्रा बताते हैं कि घाट पर भीड़ का दबाव बढ़ने लगा है। समतलीकरण के साथ ही तट के दूसरे हिस्सों में भी बालू की बोरियां बिछाई जानी चाहिए, ताकि भक्तों को फिसलन का सामना न करना पड़े।
एसडीआरएफ ने शुरू की गश्त
दशाश्वमेध घाट मंगलवार को कांवड़ियों से पटा रहा। घाट पर जल पुलिस के साथ ही एसडीआरएफ के जवानों की टीमें लगाई गई हैं, ताकि कोई गहरे पानी में न जाने पाए। जलमार्ग पर गश्त शुरू हो गई है। दूर से आए कांवड़ियों को जेटी के भीतर ही रहकर डुबकी लगाने की सलाह दी जाती रही। प्रशिक्षित गोताखोरों को भी घाट पर लगाया गया है, ताकि किसी तरह की अनहोनी को समय रहते रोका जा सके।
घाट पर लगे हाई मास्ट, नाले किए गए बंद
दशाश्वमेध घाट पर बहने वाले नालों को बंद कर दिया गया है। रात को दूधिया रोशनी बनी रहे, इसके लिए घाट पर हाई मास्ट लगा दिए गए हैं। सफाई टीमें लगाई गईं हैं, ताकि भक्तों को किसी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े।