कृषि बिल के विरोध में एकजुटता दिखाते हुए किसान यूनियनों ने शुक्रवार को एक बार फिर बड़े आंदोलन का ऐलान किया है। धरना-प्रदर्शन के अलावा उन्होंने रैली निकालने और चक्काजाम की भी घोषणा की है। ऐसे में तनाव की स्थिति भी बन गई है। कृषि संबंधी तीन बिल के विरोध में विभिन्न संगठनों की ओर से शुक्रवार को रेल रोको, बंदी आदि आंदोलन की घोषणा की गई है। इसके समर्थन में जिले के किसानों ने भी बड़े आंदोलन की रणनीति बनाई है। भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक की ओर से सुलेमसराय में चक्काजाम की घोषणा की गई है। जिलाध्यक्ष अनुज सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय स्मारक फांसी इमली के सामने दिन में 10 से चार बजे तक चक्काजाम किया जाएगा। यदि पुलिस ने रोकने की कोशिश की तो गिरफ्तारी देने से भी वह पीछे नहीं हटेंगे।
एआईकेएससीसी की ओर से जसरा में बड़ी रैली निकालने की तैयारी है। इसके अलावा एआईकेएससीसी से संबद्ध अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा तथा अन्य किसान यूनियनों की ओर से संयुक्त रूप से बालसन चौराहा पर धरना दिया जाएगा। एआईकेएससीसी के राष्ट्रीय महासचिव डॉ.आशीष मित्तल ने बताया कि तीनों बिल किसानों के साथ धोखा हैं। इससे किसानों का नुकसान तो होगा ही, खाद्यान्न की समस्या भी खड़ी हो जाएगी। उनका कहना है कि बड़ी आबादी कोटे की दुकान से सस्ते दर पर राशन लेती है। इन बिल के आने से इस व्यवस्था को खतरा है। उन्होंने बताया कि आंदोलन में कई संगठन से जुड़े किसान तथा मजदूर शामिल होंगे। आंदोलन को सफल बनाने के लिए जंनसपर्क के अलावा यू-ट्यूब तथा अन्य सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर अपील भी की गई है। अखिल भारतीय किसान सभा के भूपेंद्र पांडेय, उदय नारायण, अखिल भारतीय किसान महासभा के सुभाष पटेल ने भी बालसन चौराहा पर आयोजित धरना में शामिल होने की घोषणा की। साथ ही लोगों से आंदोलन को सफल अपील की।
कर्मचारियों की नौकरी, किसानों की खेती छीन रही सरकार : रेवती
सपा के वरिष्ठ नेता राज्यसभा सदस्य रेवती रमण सिंह ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाया है। उन्होंने बयान जारी किया है कि कर्मचारियों की नौकरी और किसानों की खेती छीनी जा रही है। सरकार पर लोकतंत्र के साथ मजाक करने का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि संसद में बहुमत नहीं होने के बावजूद सरकार किसान विरोधी बिल को पास करा रही है। सांसद का कहना है कि सरकार का दावा है कि ये बिल किसानों के हित में है। यदि ऐसा है तो बिल का स्वागत है लेकिन इसमें एक प्रावधान भी किया जाना चाहिए कि कोई व्यापारी न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम कीमत पर कृषि उपज की खरीद नहीं करेगा। उन्होंने श्रम कानून संशोधन बिल का भी विरोध किया और सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।