इतिहास में छिपे तथ्यों को सामने लाना उद्देश्य
राज्य विवि के जनसंपर्क अधिकारी अविनाश कुमार श्रीवास्तव का मानना है कि इतिहास लेखन निष्पक्ष नजरिये से होना चाहिए। मुख्य धारा के इतिहास को खास माइंडसेट से लिखा गया। प्राचीन इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो. राज कुमार गुप्ता उदाहरण देते हैं कि 1921 से पहले लोग यही जानते थे कि समुद्रगुप्त के बाद चंद्रगुप्त द्वितीय शासक की गद्दी पर बैठा। बाद में कुछ पुस्तकों के हवाले से एक सेमिनार में यह तथ्य सामने आया कि समुद्रगुप्त और चंद्रगुप्त द्वितीय के बीच रामुगप्त नाम का शासक गद्दी पर बैठा था।
संगोष्ठी का उद्देश्य यही है कि इतिहास के ऐसे छिपे तथ्यों को सामने लाया जाए। लोग जानें की वास्तविक इतिहास क्या है। प्राचीन इतिहास के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रशांत सिंह का कहना है कि हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘कश्मीर फाइल्स’ को देखकर अंदाज लगाया जा सकता है कि इतिहास लेखन में कहां और क्या खामियां रह गईं।
डॉ. प्रशांत के अनुसार संगोष्ठी में 200 शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे, जिनमें क्षेत्रीय इतिहास से जुड़े कई नए तथ्य सामने आएंगे। रिसर्च पेपर में उपलब्ध नए तथ्यों को भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के सहयोग से प्रकाशित किया जाएगा। दो दिनी संगोष्ठी में देश भर से इतिहासकार जुड़ेंगे। अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना, नई दिल्ली के सचिव डॉ. बालमुकुंद पांडेय मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे।