कानून का उल्लंघन और पथराव कर जानलेवा हमले के मुकदमे में शनिवार को कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और बॉलीवुड अभिनेता राजबब्बर ने स्पेशल कोर्ट एमपीएमएलए में सरेंडर कर दिया। उनके खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी हुआ था। शनिवार को अदालत में हाजिर होने के बाद उन्होंने जमानत अर्जी पेश की। सुनवाई के बाद कोर्ट ने अंतरिम जमानत पर राजबब्बर को रिहा करने का आदेश दिया। उनकी नियमित जमानत पर सुनवाई पांच अप्रैल को होगी। कोर्ट ने राजबब्बर को इस दिन सरेंडर करने को कहा है।
स्पेशल कोर्ट के जज पवन कुमार तिवारी ने एडीजीसी राजेश गुप्ता, विशेष अधिवक्ता वीरेन्द्र कुमार उर्फ गोपाल सिंह और बचाव पक्ष के अधिवक्ता शीतला प्रसाद मिश्र और पीके तिवारी को सुनकर यह आदेश दिया है। घटना 17 अगस्त 2015 की लखनऊ के हजरतगंज थाने की है। एसआई प्यारे लाल ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप है कि कांग्रेसी नेता गन्ना भुगतान, अपराध और भ्रष्टाचार आदि को लेकर धरना स्थल पर भाषण दे रहे थे। सभा से नेतागण पांच हजार समर्थकों को लेकर विधान सभा घेरने के लिए चल दिए। पुलिस ने बैरियर लगा कर रोकने का प्रयास किया तो प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव कर कर दिया।
घटना के दौरान एडीएम निधि श्रीवास्तव, एसपी राजीव मेहरोत्रा, सीओ अवनीश मिश्रा, एसओ विकास पांडेय सहित दर्जनों पुलिस अधिकारियों को गंभीर चोटें आई थी। विवेचना के बाद पुलिस ने राजबब्बर, निर्मल खत्री, मधुसूदन मिस्त्री, प्रदीप माथुर, रीता बहुगुणा जोशी सहित 18 लोगों और पांच हजार अज्ञात कार्यकर्ताओं के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। कोर्ट ने सभी अभियुक्तों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है। राजबब्बर की जमानत अर्जी का अभियोजन ने विरोध किया।
राजबब्बर की जमानत पर सुनवाई के दौरान उनका पक्ष रखने के लिए हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और फौजदारी के नामी वकील गोपाल चतुर्वेदी और कांग्रेसी नेता पूर्व सांसद प्रमोद तिवारी भी अधिवक्ता के ड्रेस में पहुंचे। इसके अलावा जिला न्यायालय में पूरे समय कांग्रेसियों का जमावड़ा लगा रहा।