उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश महाकुंभ मेला प्रशासन के साथ साधु-संतों के लिए फिर से मुश्किलें खड़ी कर सकती है। पहाड़ों पर हो रही बारिश का पानी मौनी अमावस्या के पहले संगम तक पहुंचने की संभावना है। ऐसे होने पर गंगा किनारे बने घाटों के कटान और साधु-संतों के शिविरों में पानी घुसने का खतरा भी उत्पन्न हो सकता है।
पिछले दो दिनों में गंगा का जलस्तर तेजी से घटा है। इसकी वजह से गंगा का रंग काफी काला हो गया है लेकिन पिछले सप्ताहभर से उत्तराखंड में हो रही जोरदार बारिश ने मेला प्रशासन के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। सप्ताहभर पहले भी बारिश का पानी यहां पहुंचने से गंगा के जलस्तर में एकाएक बढ़ोतरी हो गई थी। इससे कटान होने के कारण पांटून पुल नंबर 14 एवं छह को बंद करना पड़ा था। नागवासुकि चकर्ड प्लेट मार्ग सहित गंगा किनारे के कई शिविरों में भी पानी प्रवेश कर गया था।
सिंचाई विभाग के अफसरों की मानें तो पहाड़ों पर हो रही बारिश का पानी अगले तीन-चार दिनों में यहां पहुंचने की उम्मीद है। अफसरों का दावा है कि जलस्तर में एक मीटर तक बढ़ोतरी होती है तो उससे निपटने के लिए विभाग पूरी तरह तैयार है।
उधर, सूत्रों की मानें तो पहाड़ों पर हो रही बारिश के कारण नरौरा से पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। इस वजह से जलस्तर कम होने के साथ गंगा का रंग काफी काला हो गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. मोहम्मद सिंकदर के मुताबिक जलस्तर कम होने से बीओडी में निर्धारित मानक से कुछ बढ़ोतरी हुई है, लेकिन पानी बढ़ने पर इसमें सुधार हो जाएगा। मौनी अमावस्या पर स्नान योग्य पानी उपलब्ध रहेगा।