तेज हवा के साथ हो रही बारिश ने एक बार फिर किसानों की कमर तोड़ दी है। एक माह पहले जलभराव से बची धान की तैयार फसलों पर फिर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
सोरांव तहसील के विभिन्न इलाकों में तेज हवा के झोंकों के साथ दो दिन से हो रही बारिश से खेतों में खड़ी धान की फसल जमीन पर बिछ गई है। किसानों का कहना है कि धान में बालियां आ गई थीं। 15 से 20 दिन बाद कटाई होने की उम्मीद थी। अब पूरी फसल धराशायी हो गई है। खेतों में पानी भर जाने से धान सड़ने का खतरा पैदा हो गया है।
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष सोरांव तहसील में कुल 18,500 हेक्टेयर के आसपास धान की बुवाई हुई है। मऊआइमा ब्लॉक में सबसे ज्यादा 6,200 हेक्टेयर। इसमें से दो दिन की बारिश से करीब 5,000 से 6,000 हेक्टेयर फसल के प्रभावित होने का अंदेशा जताया गया है। किसान संतोष मौर्या, रामपूजन, चंद्रशेखर यादव और शिवप्रसाद प्रजापति ने बताया कि साहब 2 बीघा धान लगाए थे, बाल आ गई थी। दो दिन की हवा-पानी ने पूरी फसल बिछा दिया। अब खेत में पानी भरा है, धान सड़ जाएगा। लागत भी नहीं निकलेगी।
एसडीएम सोरांव भारती मीणा ने बताया कि बारिश थमने का बाद तहसील में स्थित प्रभावित फसलों का एक बार फिर सर्वे करा कर शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
सड़कों पर चलना दुश्वार, पगडंडियां जलमग्न
किसानों के साथ लोगों का जनजीवन भी अस्त-व्यस्त हो गया है। मऊआइमा के सुल्तानपुर खास व नविभाग से होकर हाईवे को मिलाने वाले मार्ग की स्थित सबसे अधिक दयनीय है। ग्रामीण शशिधर मिश्रा, अजय जायसवाल और सोनू यादव आदि ने बताया कि बरसात से राजीव गांधी जूनियर हाई स्कूल से करीब 200 मीटर तक सड़क पर जलभराव है।
मऊआइमा नगर पंचायत की अधिशाषी अधिकारी मीनाक्षी चतुर्वेदी ने बताया कि इस बार उम्मीद से कहीं अधिक बारिश होने से सफाई व्यवस्था सुचारू रूप से नही हो पा रही है। जलभराव कुछ निचले स्थानों पर है। पंप लगाकर समस्या का समाधान कराया जा रहा है।
हरिसेनगंज- खेतों में बिछी धान की तैयार फसल- फोटो : Samvad