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300 मीटर से बड़े भवनों पर विकसित कराएं वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली

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प्रयागराज। शहर में 300 मीटर और उससे बड़े सरकारी, निजी भवनों की छतों पर वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली विकसित की जाए। इससे न केवल भूजल स्तर सुधरेगा बल्कि वर्षा के संचित जल का सदुपयोग भी होगा।
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यह निर्देश जलशक्ति अभियान के नोडल अधिकारी और केंद्र सरकार के संयुक्त सचिव विश्वजीत बनर्जी ने पीडीए और नगर निगम के अधिकारियों को दिया है। वह बुधवार को सर्किट हाउस में दोनों विभागों के अफसरों संग बैठक में जल शक्ति अभियान के तहत किए जा रहे प्रयासों पर चर्चा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि महानगर में भूजल का स्तर तेजी से नीचे गिर रहा है, यह अत्यंत चिंता का विषय है। प्रतिदिन 396 एमएलडी की जगह सिर्फ 316 एमएलडी पानी की सप्लाई है। 181 एमएलडी ग्राउंड वाटर का इस्तेमाल किया जा रहा है। 280 एमएलडी एसटीपी का प्रोडक्शन है, जिसे नदी में छोड़ दिया जा रहा है। इस पानी का कृषि के लिए इस्तेमाल करने की प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता है।
बैठक में सचिव पीडीए दयानंद प्रसाद ने बताया कि 2009 से लेकर 19 तक पीडीए द्वारा कूल 403 ऐसे भवनों के मानचित्र पास किए गए हैं, जिनका क्षेत्रफल 300 वर्ग मीटर से अधिक है। सभी को अनिवार्य रूप से वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली लगाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि 15 सितंबर से पहले ऐसे घरों के सर्वे कराकर उन्हें रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के लिए बाध्य किया जाएगा। नगर निगम के अपर नगर आयुक्त ने बताया कि महानगर में 214000 घरों से हाउस टैक्स वसूला जाता है इन घरों में 300 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले सभी सरकारी और निजी भवन स्वामियों और विभागों को नोटिस जारी कर उन्हें रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली लगाने की अपील की जाएगी। बैठक में जिला विकास अधिकारी केके मौर्य और डॉ. निरंजन सिंह नोडल अधिकारी के तौर पर उपस्थित थे
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