आलू की फसल में भरा बारिश का पानी
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बृहस्पतिवार को हुई बारिश से आलू और सरसों की फसलों को भारी नुकसान की आशंका बन गई है। मुश्किल यह कि अभी 10 जनवरी तक इसी तरह के मौसम की चेतावनी जारी की गई है। इससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है। विगत वर्षों में सरसों तेल की कीमत में लगातार बढ़ोतरी हुई। विगत तीन वर्षों से किसानों को आलू की भी अच्छी कीमत मिल रही है। इसे देखते हुए सरसों और आलू की खेती के प्रति किसानों का रूझान बढ़ा है।
इसका अनुमान इससे ही लगाया जा सकता है कि इस बार दोनों फसलों का रकबा करीब दोगुना हो गया है लेकिन बृहस्पतिवार को हुई बारिश से किसानों में निराशा है। सोरांव के प्रगतिशील किसान मुन्ना पटेल, धीरेंद्र कुशवाहा कहना है कि खेतों में पानी लगने से फसल सड़ने की आशंका बन गई है। कृषि विज्ञान केंद्र के डॉ.मनोज कुमार सिंह का कहना है कि बारिश से तिलहनी, दलहनी और आलू की फसलों को नुकसान होगा । आगे भी ऐसे ही मौसम की चेतावनी दी गई है। यदि ऐसा हुआ तो पैदावार में भारी गिरावट होगी।
गेहूं के लिए है अमृत
बृहस्पतिवार को हुई बारिश की बूंदें गेहूं के लिए अमृत बताई जा रही हैं। डॉ.मनोज कुमार का कहना है कि किसानों को अब एक सिंचाई नहीं करनी होगी। इसके अलावा बारिश की बूंदें पौधे पर सीधे पड़ती हैं। इससे फसल को काफी फायदा होगा। हालांकि, यदि ओलावृष्टि हो गई तो फसल को नुकसान होगा।
शहरियों को मिलेगी जैविक सब्जी
शहरियों को जैविक सब्जी के लिए अब बहुत भटकना नहीं होगा। जगह-जगह जैविक सब्जी उपलब्ध होगी। बृहस्पतिवार को उप निदेशक कृषि विनोद कुमार ने एग्री स्टार्टअप ऑर्गेनिक मोबाइल एप का उद्घाटन किया। इसी क्रम में मुंडेरा मंडी परिसर स्थित उप निदेशक कार्यालय में हुई बैठक में किसानों को जैविक तरीके से सब्जी की खेती की जानकारी दी गई। उन्हें इसके लिए प्रेरित भी किया गया।