रेलवे में कैडर बदलने वाले कर्मचारियों को अब हर महीने नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा। कर्मचारी संगठनों के दबाव पर बोर्ड ने यह स्वीकार कर लिया है कि पूर्व कैडर और नियुक्ति वाले कैडर में तैनाती के बाद वेतन में कोई अंतर नहीं होने दिया जाएगा। दोनों पदों के वेतन में जो भी अंतर होगा, उसकी वेतन वृद्धि के दौरान भरपाई की जाएगी। रेलवे के इस फैसले से हजारों कर्मचारी लाभान्वित होंगे।
संरक्षा श्रेणी में शामिल रेलवे के कर्मचारी बड़ी संख्या में हर साल कैडर बदलते हैं। इसमें कैडर और विभाग बदलाव को लेकर कई व्यवस्थाएं हैं। रनिंग से जुड़े यानी गार्ड और ड्राइवर के पदों पर कार्यरत कर्मचारी भी अनफिट होने की स्थिति में ऐसे विभागों में जाते हैं जो संरक्षा श्रेणी में शामिल नहीं हैं। बताते हैं कि कई मामलों में कैडर बदलने के बाद कर्मचारियों के वेतन में कनिष्ठता और वरिष्ठता के चक्कर में बदलाव हो जाता है। शिकायतें हैं कि पूर्व के पदों पर तैनात कर्मचारियों के दूसरे पदों पर जाने के बाद वेतन में कमी हो जा रही है। नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमेन ने रेलवे बोर्ड के साथ हुई पीएनएम में इस मुद्दे को उठाया था।
बड़ी संख्या में कर्मचारियों के प्रभावित होने का हवाला देते हुए संगठन में फौरन इसमें सुधार करने की मांग उठाई थी। रेलवे बोर्ड के निदेशक स्थापना के. शंकर ने एनसीआर समेत सभी जोनों को भेजे पत्र में कहा है कि पूर्व कैडर से नए कैडर में जाने पर वेतन निर्धारण किया जाता है। यदि इससे कर्मचारियों को नुकसान होता है तो आगामी वेतनवृद्धि के साथ पुराने और नए वेतन में आए फर्क की भरपाई कर दी जाएगी। हालांकि, इसके लिए शर्त रखी गई है कि कर्मचारी को लिखित तौर पर यह स्वीकृति देनी होगी कि उसने एक्स कैडर का वेतन स्वीकार कर लिया है।