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Railway News : महाकुंभ के पहले विभूूति, नौचंदी और कालिंदी एक्सप्रेस को मिलेगा एलएचबी रेक

Mon, 29 Jul 2024 02:03 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इसी वजह से रेलवे प्रशासन ने इन तीनों ट्रेनों को एलएचबी रेक से लैस करने की तैयारी की है। एलएचबी कोच लगने के बाद जहां इन ट्रेनों की अधिकतम स्पीड बढ़ जाएगी तो वहीं दूसरी ओर बर्थ की संख्या में भी इजाफा हो जाएगा।
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ट्रेन। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वर्षों पुरानी बोगियों के सहारे दौड़ रहीं प्रयागराज रामबाग-हावड़ा विभूति एक्सप्रेस, प्रयागराज संगम-सहारनपुर नौचंदी एक्सप्रेस, प्रयागराज-भिवानी जंक्शन कालिंदी एक्सप्रेस ट्रेन का रेलवे ने कायाकल्प करने की तैयारी की है। इन ट्रेनों में पुराने आईसीएफ कोच की जगह नई लिंक हाफमैन बुश (एलएचबी) बोगियां लगाई जाएंगी। बताया जा रहा है कि दिसंबर माह में यह तीनों ट्रेनें एलएचबी रेक से लैस हो जाएंगी।

हावड़ा जाने वाली विभूति एक्सप्रेस पूर्व रेलवे, नौचंदी एक्सप्रेस उत्तर रेलवे एवं कालिंदी एक्सप्रेस उत्तर मध्य रेलवे द्वारा संचालित की जाती है। यह तीनों ही ट्रेनें पुराने आईसीएफ कोच के सहारे चल रही हैं। इन ट्रेनों में लगे कुछ कोच ऐसे हैं जो 20 वर्ष पुराने हैं। पुराने कोचे होने की वजह से इन्हें अधिकतम 110 किमी की रफ्तार से ही चलाया जा सकता है।

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इसी वजह से रेलवे प्रशासन ने इन तीनों ट्रेनों को एलएचबी रेक से लैस करने की तैयारी की है। एलएचबी कोच लगने के बाद जहां इन ट्रेनों की अधिकतम स्पीड बढ़ जाएगी तो वहीं दूसरी ओर बर्थ की संख्या में भी इजाफा हो जाएगा। कालिंदी एक्सप्रेस की बात करें तो इसमें पिछले वर्ष ही एलएचबी रेक लग जाना था लेकिन अब दिसंबर 2024 के पूर्व रेलवे इस ट्रेन में एलएचबी रेक लगा देगा। इसी तरह विभूति और नौचंदी एक्सप्रेस में भी एलएचबी रेक महाकुंभ के पूर्व लगाए जाने की तैयारी है।



 

एलएचबी रेक की खूबियां
 
एलएचबी रेक वाली ट्रेनें 160 से 180 किमी की रफ्तार से दौड़ सकती हैं। यह कोच आईसीएफ कोच के मुकाबले हल्के होते हैं। एलएचबी कोच की लंबाई 23.54 मीटर एवं आईसीएफ कोच की लंबाई 21.77 मीटर होती है। आईसीएफ के मुकाबले एलएचबी कोच की खिड़कियां बड़ी और चौड़ी होती हैं। एलएचबी कोच 60 डेसिबल तक की आवाज करते हैं। इससे एसी कोच में कम आवाज रहती है जबकि आईसीएफ 100 डेसिबल तक की आवाज करते हैं।

एलएचबी कोच की कपलिंग सीबीसी टाइप यानी सेंटर बफर कपलर वाली होती है यानी हादसे के वक्त यह कोच एक दूसरे के ऊपर चढ़ते नहीं हैं। वहीं, आईसीएफ कोच दुर्घटना के समय कपलिंग टूटने की वजह से एक दूसरे के ऊपर चढ़ने के साथ एक दूसरे में घुस जाते है। इससे जान-माल की क्षति ज्यादा होती है। लंबाई ज्यादा होने की वजह से एलएचबी कोच में बर्थ ज्यादा रहती हैं।
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सूबेदारगंज-बांद्रा, सिकंदराबाद और लोकमान्य तिलक के बढ़ाए गए फेरे

सूबेदारगंज-बांद्रा, सूबेदारगंज-लोकमान्य तिलक और सूबेदारगंज-सिकंदराबाद एक्सप्रेस के फेरे बढ़ा दिए गए हैं। अब इन तीनों ट्रेनों का संचालन अगले माह भी होगा। इसकी समय सारिणी भी रेलवे प्रशासन ने जारी कर दी है।

सूबेदारगंज से चलने वाली 04115 लोकमान्य तिलक स्पेशल का संचालन प्रत्येक बृहस्पतिवार एक अगस्त से 29 अगस्त तक होगा। वापसी में लोकमान्य तिलक से 04116 का संचालन प्रत्येक शुक्रवार दो से 30 अगस्त तक होगा। इसी तरह 04121 सूबेदारगंज-सिकंदराबाद एक से 29 अगस्त तक प्रत्येक बृहस्पतिवार को संचालित होगी। वापसी में 04122 सिकंदराबाद से प्रत्येक शनिवार तीन अगस्त से 31 अगस्त तक चलेगी।

वहीं,सूबेदारगंज से बांद्रा टर्मिनल के लिए 04125 का संचालन प्रत्येक सोमवार पांच से 26 अगस्त तक एवं वापसी में बांद्रा टर्मिनल से गाड़ी संख्या 04126 का संचालन प्रत्येक मंगलवार पांच से 26 अगस्त के मध्य होगा।

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