रेलवे में अनुकंपा नियुक्ति के मामलों का निस्तारण अब महीनों में नहीं बल्कि सप्ताह भर में होगा। यूं तो रेलवे बोर्ड द्वारा अनुकंपा नियुक्ति का जो चार्टर है उसमें नियुक्ति प्रकरण को 90 दिन में करना चाहिए, लेकिन एनसीआर के इलाहाबाद मंडल ने महज पांच दिन में ही एक रेलकर्मी की मौत होने के बाद उसकी पत्नी को महज पांच दिन बाद ही नियुक्ति पत्र सौंप गया। एनसीआर के इलाहाबाद मंडल में यह पहला मौका है कि जब किसी रेलकर्मी की मृत्यु के महज पांच दिन बाद ही उसके आश्रित को रेलवे में नौकरी मिल गई।
इस वित्तीय वर्ष की शुरुआत में अनुकंपा नियुक्ति के कुल 98 प्रकरण लंबित थे। माह नवंबर 2019 में 103 प्रकरण आए। इस तरह से वित्तीय वर्ष 2019-20 में कुल 201 प्रकरणों में से 164 प्रकरणों में नियुक्ति की प्रक्रिया की गई। बचे हुए 37 प्रकरणों पर भी कार्रवाई की जा रही है। एनसीआर इलाहाबाद मंडल के पीआरओ सुनील गुप्ता ने बताया कि पिछले माह उमा शंकर नाम के ट्रैक मैन की ऑन ड्यूटी मौत हो गई थी।
उसकी पत्नी संगीता देवी को महज पांच दिन में ही नियुक्ति प्रदान कर दी गई। पीआरओ ने बताया कि अगर कर्मचारी की मृत्यु सेवा काल में हो जाए और उसके बच्चे अवयस्क हो तो अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति का मामला तब तक रोका जा सकता है जब तक उनके बेटा या बेटी वयस्क नहीं हो जाते।