रेलवे के पेट्रोल मैन की सतर्कता से बुधवार को एक बड़ा रेल हादसा होते-होते बच गया। इलाहाबाद के निकट लोहगरा और बेवारा स्टेशन के बीच बुधवार की सुबह डाउन लाइन पर रेल पटरी में फ्रैक्चर हो गया था। इसी दौरान वहां ड्यूटी पर तैनात पेट्रोल मैन की निगाह रेल फ्रैक्चर पर पड़ गई। उसने उसकी सूचना स्टेशन मास्टर लोहगरा को दी। सूचना मिलते ही हरकत में आए रेल महकमे ने वहां से गुजरने वाली मुंबई-इलाहाबाद तुलसी एक्सप्रेस को रोक लिया। इस दौरान घंटे भर इस रूट पर रेल आवागमन प्रभावित रहा। उधर, पेट्रोल मैन की सूझबूझ और सतर्कता को देखते हुए रेल महकमे ने उसे संरक्षा पुरस्कार देने का निर्णय लिया है।
दरअसल, बुधवार को इलाहाबाद-मानिकपुर रेल खंड के बेवारा-लोहगरा में रेल पेट्रोलिंग के दौरान पेट्रोल मैन श्याम को डाउन लाइन में रेल फ्रैक्चर दिखा। उसने सुबह 11.45 बजे इसकी सूचना स्टेशन मास्टर लोहगरा को दी। इसी दौरान वहां से 22129 लोकमान्य तिलक-इलाहाबाद तुलसी एक्सप्रेस को गुजरना था। रेलवे कंट्रोल से मिली सूचना के बाद तुलसी एक्सप्रेस को रोक दिया गया। इसके बाद उसे 10 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से रेल फ्रैक्चर वाले स्थान से गुजारा गया। अगर वहां से तुलसी तेज रफ्तार से गुजरती तो नवंबर 2017 में मानिकपुर में हुए वास्कोडिगामा-पटना एक्सप्रेस रेल हादसे की पुनरावृत्ति हो सकती थी। फिलहाल वहां तुलसी को गुजारने के बाद ट्रैक मरम्मत का काम शुरू किया। दिन में 12.50 बजे पटरी के अनुरक्षण उपरांत 20 किमी प्रति घंटा के कॉशन के साथ ट्रैक फिट घोषित कर रेल परिचालन शुरू कर दिया गया।
रेलवे अफसरों के अनुसार इस वाकये के दौरान सिर्फ एक गाड़ी ही प्रभावित हुई। हालांकि तुलसी के बाद यहां से सारनाथ एक्सप्रेस को भी गुजरना था। उत्तर मध्य रेलवे के सीपीआरओ गौरव कृष्ण बंसल के मुताबिक रेलवे की ओर से पेट्रोल मैन श्याम और आकस्मिक संदेश पर गाड़ी को नियंत्रित करते हुए रोकने तथा संरक्षित परिचालन सुनिश्चित करने के लिए तुलसी एक्सप्रेस के लोको पॉयलट आरपी झा, सहायक लोको पॉयलट परमानंद मीना को संरक्षा पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। इसके तहत उन्हें प्रशस्ति पत्र एवं नकद पुरस्कार दिया जाएगा।
बुधवार की सुबह लोहगरा के निकट रेल फ्रैक्चर की सूचना मिलते ही रेल महकमे में हड़कंप मच गया। अफसरों को पिछले साल 24 नवंबर को हुआ वास्कोडिगामा-पटना रेल हादसा याद आ गया। दरअसल, उक्त रेल हादसे की एक वजह रेल फ्रैक्चर भी रही थी। उसे सीआरबी अश्विनी लोहानी के बाद सीआरआर पूर्वोत्तर परिमंडल ने भी अपने जांच रिपोर्ट में उजागर किया था।