इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के वीसी ने कहा कि वे इस्तीफा देने को हैं तैयार
इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय परिसर एक बार फिर आंदोलनों की वजह से अराजकता की चपेट में होगा। छात्रसंघ के निवर्तमान पदाधिकारियों और छात्र नेताओं के खिलाफ निष्कासन एवं निलंबन की कार्रवाई से विद्यार्थियों में जबरदस्त नाराजगी है। अलग-अलग संगठनों की बैठक में विद्यार्थियों ने आरोपी नेताओं का पक्ष सुने बिना विश्वविद्यालय प्रशासन की एकतरफा कार्रवाई को गैर कानूनी तथा अलोकतांत्रिक बताया। उन्होंने कार्रवाई के विरोध में तथा कुलपति के इस्तीफे की मांग को लेकर सोमवार से आंदोलन की भी घोषणा की है।
निष्कासित छात्र नेताओं आनंद सिंह, सूर्य प्रकाश मिश्रा, निवर्तमान उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह, संयुक्त सचिव श्रवण कुमार जायसवाल की अगुवाई में शनिवार को हुई बैठक में विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्रवाई पर नाराजगी जताई गई। उन्हाेंने कुलपति के खिलाफ आंदोलन चलाने की घोषणा की। इसके लिए संयुक्त संघर्ष समिति का गठन किया गया। निवर्तमान अध्यक्ष ऋचा सिंह ने विश्वविद्यालय प्रशासन के फैसले को अलोकतांत्रिक बताया। आरोप लगाया कि कुलपति छात्रसंघ पदाधिकारियों के खिलाफ दुर्भावना से ग्रसित होकर कार्रवाई कर रहे हैं। उन्होंने निष्कासन और निलंबन वापस न लेने पर आंदोलन की चेतावनी दी। एबीवीपी की बैठक में भी विश्वविद्यालय प्रशासन के इस फैसले के खिलाफ आंदोलन की घोषणा की गई।
दस्यों ने इस फैसले की कड़े शब्दों में निंदा की। बैठक में मुकेश गौड़, नीरज प्रताप सिंह, देवेंद्र आदि मौजूद रहे। आइसा की बैठक में भी छात्र नेताओं के निष्कासन और निलंबन की भर्त्सना की गई। उन्होंने इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया। छात्रों ने इसके खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी। बैठक में अर्थशास्त्र विभाग में महिला शिक्षक के साथ अभद्रता की भी निंदा की गई। उन्होंने इसकी जांच कराने की मांग की। बैठक में प्रदेश सचिव सुनील मौर्य, रुस्तम कुरैशी, प्रदीप कुमार, अनिरुद्ध शर्मा आदि मौजूद रहे।