पद्मश्री रघु राय के साथ कमल किशोर कमल
देश के प्रख्यात फोटोग्राफर पद्मश्री रघु राय का शनिवार को 83 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार रविवार को दिल्ली के लोधी रोड पर किया गया। उनके निधन से फोटोग्राफी और मीडिया जगत में शोक की लहर है। रघु राय का इलाहाबाद (अब प्रयागराज) से गहरा और आत्मीय जुड़ाव रहा। उन्होंने अपने कैमरे के जरिये कुंभ मेले की आस्था और सांस्कृतिक विविधता को देश-दुनिया तक पहुंचाया।
फोटोग्राफर कमल किशोर कमल बताते हैं कि उनकी रघु राय से पहली मुलाकात 1989 में प्रगति मैदान के पुस्तक मेले में हुई थी। उस समय वह उनकी किताब इंदिरा गांधी को ध्यान से देख रहे थे, लेकिन खरीदने में असमर्थ थे। यह देखकर रघु राय ने खुद किताब लेकर उस पर अपने हस्ताक्षर के साथ उन्हें भेंट कर दी। यहीं से गुरु-शिष्य का रिश्ता शुरू हुआ।
उन्होंने बताया की रघु राय हमेशा अपने शिष्यों को प्रोत्साहित करते थे। जब भी वे इलाहाबाद या आसपास आते पहले से सूचना देकर पूरा समय साथ बिताते थे। वर्ष 2001 के कुंभ में उनकी बनाई गई डॉक्यूमेंट्री का उद्घाटन मीडिया सेंटर में किया गया था। इसके अलावा कई कुंभ मेलों को साथ मिलकर कवर किया। रघु राय का व्यवहार बेहद आत्मीय था।
उनके साथ बिताए गए पलों को कैमरे में कैद करने का अवसर भी मिला जो अमूल्य धरोहर बन चुके हैं। 2019 में उनके जीवन पर आधारित एक विशेष फोटो कलेक्शन तैयार किया गया। इसमें कमल की खींची गईं तस्वीरों की संख्या सबसे अधिक है। 1942 में पंजाब के झंग (अब पाकिस्तान) में जन्मे रघु राय ने 1965 में द स्टेट्समैन से फोटो पत्रकार के रूप में अपने कॅरिअर की शुरुआत की थी।
इसके बाद 1982 में इंडिया टुडे से जुड़े और वहां करीब दस वर्षों तक फोटो संपादक के रूप में कार्य किया। उनकी प्रमुख कृतियों में रघु रायज दिल्ली, द सिख्स, कलकत्ता, ताजमहल, खजुराहो और मदर टेरेसा जैसी चर्चित पुस्तकें शामिल हैं, जिनमें भारत की विविधता और संवेदनाओं को सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया है।