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रबीउल अव्वल : या हुसैन की सदाओं के साथ रुखसत हुआ माहे गम, चुप ताजिया के जुलूस में गूंजीं नौहा मातम की सदाएं

Mon, 25 Sep 2023 12:29 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

अंजुमन हैदरिया ने नौहा व मातम की सदाओं के साथ कदीमी मार्ग से होते हुए चकिया बड़ी करबला पर पहुंचकर इस जुलूस का समापन किया। अंत में ताबूत व चुप ताजिया पर चढ़ाए गए फूलों को अकीदत व एहतेराम के साथ सुपुर्दे खाक किया गया।
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रविवार को रानीमंडी से निकले चुप ताजिया के जुलूस में ताबूत का बोसा लेते अकीदतमंद। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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मोहर्रम के चांद निकलने के साथ करबला के शहीदों की याद में शुरू हुआ 68 दिवसीय अय्यामे गम का सिलसिला रविवार को अलविदाई मातम के साथ थम गया। रबीउल अव्वल की आठवीं तारीख यानी रविवार को इमाम हसन अस्करी की शहादत पर अय्यामे अजा का अंतिम जुलूस निकाला गया।

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बशीर हुसैन की सरपरस्ती में रानीमंडी के चकय्या नीम स्थित इमामबाड़ा मिर्जा नकी बेग में चुप ताजिया की मजलिस हुई। इसे खिताब करते हुए मौलाना रजा अब्बास जैदी ने रसूले खुदा, बीबी फातिमा जहरा और इमाम मेहंदी को करबला के शहीदों का पुरसा पेश किया। फिर चुप ताजिया का जुलूस रानीमंडी से निकाला गया।

अंजुमन हैदरिया ने नौहा व मातम की सदाओं के साथ कदीमी मार्ग से होते हुए चकिया बड़ी करबला पर पहुंचकर इस जुलूस का समापन किया। अंत में ताबूत व चुप ताजिया पर चढ़ाए गए फूलों को अकीदत व एहतेराम के साथ सुपुर्दे खाक किया गया। मौलाना जरगाम हुसैन, आमिरुर रिजवी, सैयद अफजल अब्बास और सैयद मो. अस्करी समेत कई लोग मौजूद रहे।
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दूसरी ओर दरियाबाद के ऐतिहासिक बंगले में सैकड़ों वर्ष पुराना अख्तर रजा खां से अमारी का जुलूस निकाला गया, जिसमें अंजुमन शब्बीरिया, मजलूमिया, गुंचए कासिमिया, अब्बासिया, हुसैनिया कदीम और हाशिमिया ने अलविदाई पुरसा पेश किया। इसके अलावा सलवात अली खां के अजाखाने से निकाले गए अमारी के जुलूस में जहरा फाउंडेशन की ओर से सबील लगाई गई।

रविवार को रानीमंडी से निकले चुप ताजिया के जुलूस में ताबूत का बोसा लेते अकीदतमंद। - फोटो : अमर उजाला।

आखिरी मातम में उमड़ी अकीदतमंदों की भीड़, दिया पुरसा

यमुनापार के दांदूपुर गांव में भी रविवार को अय्यामे अजा का आखिरी मातम हुआ। चुप ताजिया का पहला जुलूस इमामबाड़ा मरहूम नजर अब्बास से निकाला गया, जिसमें प्रख्यात अंजुमनों ने नौहा व मातम का पुरसा पेश किया। इसके बाद इमामबाड़ा अलीमिंया से ताबूत व जुल्जनाह की शबीह निकाली गई। वहीं, अंजुमन अब्बासिया की ओर से हुए अलविदाई मातम में बड़ी संख्या में मातमदारों ने जंजीर का मातम पेश किया।

सचिव इनायत हुसैन की कयादत में निकाले गए जुलूस में मौलाना तुफैल अब्बास ने मजलिस पढ़ी, जिसके बाद जुलूस कदीमी मार्ग से होता हुआ सदर मस्जिद पहुंचा। मौलाना दिलशाद अब्बास की तकरीर के बाद अंजुमन के नौहाख्वान अली अब्बास, अली हसन, मोहम्मद, साहिल, कुमैल व काविश ने पुरदर्द अंदाज में नौहा पढ़ा। आखिर में अंजुमन अलमदारे हुसैनी का मातम सदर इमामबाड़े में हुआ। यहां मोजिज अब्बास, औलाद इमाम, इनायत हुसैन, इंतिजार हुसैन, इरशाद अब्बास, अनवर हसन और शबीह हैदर रहे। 

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रविवार को रानीमंडी से निकले चुप ताजिया के जुलूस में ताबूत का बोसा लेते अकीदतमंद। - फोटो : अमर उजाला।

आज मनाई जाएगी ईदे जहरा
 

68 दिनों तक करबला के शहीदों की याद में काले लिबास में रहकर शोकाकुल रहने वाले शिया समुदाय की ओर से सोमवार को ईदे जहरा मनाकर खुशी जाहिर की जाएगी। इस अवसर पर रंगीन कपड़े पहने जाएंगे और मीठे पकवान बनाए जाएंगे। सोग मनाने वाली महिलाएं भी नई चूड़ियां पहनकर खुशी का इजहार करेंगी। समुदाय के लोग एक-दूसरे के घर जाकर ईदे जहरा की मुबारकबाद पेश करेंगे। शहर के विभिन्न अजाखानों में महफिल सजाई जाएगी और सेंवई खिलाई जाएगी। 

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