रविवार को रानीमंडी से निकले चुप ताजिया के जुलूस में ताबूत का बोसा लेते अकीदतमंद।
- फोटो : अमर उजाला।
आखिरी मातम में उमड़ी अकीदतमंदों की भीड़, दिया पुरसा
यमुनापार के दांदूपुर गांव में भी रविवार को अय्यामे अजा का आखिरी मातम हुआ। चुप ताजिया का पहला जुलूस इमामबाड़ा मरहूम नजर अब्बास से निकाला गया, जिसमें प्रख्यात अंजुमनों ने नौहा व मातम का पुरसा पेश किया। इसके बाद इमामबाड़ा अलीमिंया से ताबूत व जुल्जनाह की शबीह निकाली गई। वहीं, अंजुमन अब्बासिया की ओर से हुए अलविदाई मातम में बड़ी संख्या में मातमदारों ने जंजीर का मातम पेश किया।
सचिव इनायत हुसैन की कयादत में निकाले गए जुलूस में मौलाना तुफैल अब्बास ने मजलिस पढ़ी, जिसके बाद जुलूस कदीमी मार्ग से होता हुआ सदर मस्जिद पहुंचा। मौलाना दिलशाद अब्बास की तकरीर के बाद अंजुमन के नौहाख्वान अली अब्बास, अली हसन, मोहम्मद, साहिल, कुमैल व काविश ने पुरदर्द अंदाज में नौहा पढ़ा। आखिर में अंजुमन अलमदारे हुसैनी का मातम सदर इमामबाड़े में हुआ। यहां मोजिज अब्बास, औलाद इमाम, इनायत हुसैन, इंतिजार हुसैन, इरशाद अब्बास, अनवर हसन और शबीह हैदर रहे।
रविवार को रानीमंडी से निकले चुप ताजिया के जुलूस में ताबूत का बोसा लेते अकीदतमंद।
- फोटो : अमर उजाला।
आज मनाई जाएगी ईदे जहरा
68 दिनों तक करबला के शहीदों की याद में काले लिबास में रहकर शोकाकुल रहने वाले शिया समुदाय की ओर से सोमवार को ईदे जहरा मनाकर खुशी जाहिर की जाएगी। इस अवसर पर रंगीन कपड़े पहने जाएंगे और मीठे पकवान बनाए जाएंगे। सोग मनाने वाली महिलाएं भी नई चूड़ियां पहनकर खुशी का इजहार करेंगी। समुदाय के लोग एक-दूसरे के घर जाकर ईदे जहरा की मुबारकबाद पेश करेंगे। शहर के विभिन्न अजाखानों में महफिल सजाई जाएगी और सेंवई खिलाई जाएगी।