भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन ने अधिवक्ताओं से अपील की है कि वह जनता को त्वरित न्याय दिलाने के लिए काम करें। यह वकीलों का परम दायित्व है, क्योंकि विलंब से मिला न्याय न्याय नहीं मिलने के बराबर है। उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं का दायित्व है कि वह विधिक कार्य के साथ ही सामाजिक कार्य भी करें और आम जनता को उनके कानूनी अधिकारों से अवगत कराएं। जस्टिस बालाकृष्णन डा. भीमराव अंबेडकर वैचारिक अधिवक्ता मंच उच्च न्यायालय द्वारा संविधान दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘हमारा समाज और संविधान’ को मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि समाज की आर्थिक स्थिति को सुधारे बिना सामाजिक न्याय संभव नहीं है। संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए हाईकोर्ट के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश जस्टिस सभाजीत यादव ने कहा कि संविधान की मूल भावना सामाजिक और आर्थिक बराबरी देना है। यह लक्ष्य सामाजिक हिस्सेदारी के बिना नहीं प्राप्त किया जा सकता है। पूर्व सांसद लाल मणि प्रसाद ने कहा कि डा. अंबेडकर के सपनों को पूरा करने के लिए संविधान को शत प्रतिशत प्रभावी ढंग से लागू करना होगा। संगोष्ठी में न्यायमूर्ति डीआर चौधरी और वरिष्ठ अधिवक्ता गुरु प्रसाद ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
अधिवक्ता विजय गौतम ने अतिथियों का स्वागत किया। अध्यक्षता विपिन बिहारी ने की। महासचिव अरविंद कुमार भारद्वाज ने मुख्य अतिथि और अन्य अतिथियों को प्रतीक चिह्न भेंट किया। कार्यक्रम में दीपांजलि म्यूजिकल ग्रुप के द्वारा रंगारंग कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी गई। संगोष्ठी के आयोजन में परमेश्वर चौधरी, विभूति प्रसाद, राजेश कुमार, ओमप्रकाश, विनय पांडेय, ताराचंद्र कौशल, वीरेंद्र सिंह राजभर, अरुण कुमार, केके चौधरी, विजय कुमार और जसवंत सिंह आदि का सहयोग रहा।