इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संघटक कॉलेज ईसीसी में वित्तीय अनियमितताओं के कुछ नए मामले सामने आए हैं। गत दिनों इन मामलों की जांच पूरी करने के बाद कमेटी की ओर से दी गई रिपोर्ट के अनुसार कॉलेज परिसर में हुए भवन निर्माण का भुगतान नियमों की अनदेखी करते हुए किया गया। साथ ही प्रोजेक्टर, फोटोकॉपी मशीन आदि की खरीद प्रक्रिया भी रिपोर्ट में संदिग्ध बताया गया है।
इविवि के वित्त अधिकारी की ओर से 25 फरवरी को प्रारंभिक जांच रिपोर्ट कुलपति को सौंपी जा चुकी है। इविवि के पीआरओ डॉ. चितरंजन कुमार सिंह के अनुसार रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2017 में कॉलेज परिसर में संस्कृत, अंग्रेजी एवं भूगोल विभाग में निर्माण कार्य कराए गए और भुगतान में सामान्य वित्तीय नियम 2005 एवं 2017 का जान बूझकर उल्लंघन किया गया। कुल 70 लाख 92 हजार 198 रुपये का भुगतान भारत सरकार की वित्तीय प्रक्रियाओं को बाईपास करके किया गया।
भूगोल विभाग में भवन निर्माण के लिए आदेश 26 अप्रैल 2017 को जारी किया गया जबकि संबंधित फर्म ने 22 मार्च 2017 को ही कार्य पूरा करना दर्शाया है। सवाल उठ रहे हैं कि जब कार्य का आदेश ही नहीं हुआ तो कम पहले कैसे पूरा हो गया। पीआरओ के मुताबिक इससे स्पष्ट है कि कॉलेज ने पहले किसी फार्म से कार्य करवाया और बाद में निविदा आमंत्रित करने का दिखावा किया। भूगोल विभाग में निर्माण के लिए संबंधित फर्म को 18 लाख 84 हजार 805 रुपये का भुगतान किया गया, जो गलत है।
तीन विभागों में निर्माण कार्य के लिए जिन फर्मों ने निविदा डाली, उन्होंने हूबहू एक ही तरह के वाक्यों का प्रयोग किया। इससे संदेह होता है कि यह काम किसी एक व्यक्ति या एक कार्यालय के इशारे पर किया गया। इसके अलावा निविदा पर उसके खुलने की तिथि एवं संबंधित संस्था के व्यक्ति के हस्ताक्षर होते हैं। निविदा न तो तिथि अंकित है न ही तत्कालीन प्राचार्य डॉ. एम. मैसी के हस्ताक्षर हैं। इससे भुगतान की वैधता संदिग्ध हो जाती है। इसके अलावा ईसीसी में 2012 से 2017 के बीच तकरीबन 70 लाख रुपये के प्रोजेक्टर, फोटोकॉपी आदि मशीनें खरीदी गईं। प्रारंभिक जांच में साक्ष्य मिले हैं कि इस प्रक्रिया में भी नियमों का पालन नहीं किया गया।