संगमनगरी की तीनों लोकसभा सीटों पर कांग्रेस 1984 के बाद ही जीत के लिए तरस रही है। 1984 में ही इंदिरा गांधी की हत्या और राजीव गांधी के उदय के बाद हुए आम चुनाव में जिले की तीनों लोकसभा सीटें इलाहाबाद, फूलपुर एवं चायल पर कांग्रेस को जीत मिली थी। उसके बाद हुए आठ आम चुनाव में कांग्रेस प्रयागराज में लगातार अपना जनाधार खोती रही। इस बार कांग्रेसियों को उम्मीद है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश की बागडोर प्रियंका को सौंपे जाने के बाद उसके पुराने दिन लौटेंगे।
कांग्रेस पार्टी का 1885 में अपनी स्थापना के समय से ही प्रयाग से गहरा नाता रहा है। 1967 से पहले इलाहाबाद जिले की तीनों संसदीय सीटों पर कांग्रेस पार्टी का निर्विवाद रूप से कब्जा रहा। 1984 का आम चुनाव राजीव गांधी के नेतृत्व में हुआ। इस चुनाव में जिले की तीनों लोकसभा सीटें फूलपुर से राम पूजन पटेल, इलाहाबाद से सिने स्टार अमिताभ बच्चन और चायल से बीएल शैलेश ने जीतीं। इस बाद में अमिताभ बच्चन ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद हुए उप चुनाव में संयुक्त विपक्ष के उम्मीदवार विश्वनाथ प्रताप सिंह ने कांग्रेस के सुनील शास्त्री को पराजित किया।
1989 के आम चुनाव में इलाहाबाद से जनेश्वर मिश्र, फूलपुर से राम पूजन पटेल और चायल से कांग्रेस के राम निहोर राकेश चुने गए।
1991 से 2014 के बीच हुए चुनाव में इलाहाबाद से जनता दल की सरोज दुबे, भाजपा के मुरली मनोहर जोशी तीन बार, सपा के कुंवर रेवती रमण सिंह दो बार, भाजपा के श्यामा चरण गुप्ता एक बार चुने गए। इसी प्रकार फूलपुर से राम पूजन पटेल तीन बार, सपा के जंग बहादुर पटेल दो बार, सपा के धर्मराज पटेल एक बार, सपा के अतीक अहमद एक बार, बीएसपी से कपिल मुनि करवरिया एक बार, भाजपा के केशव प्रसाद मौर्य एक बार एवं 2018 में हुए उप चुनाव में सपा के नागेंद्र प्रताप सिंह एक बार चुने गए।
चायल लोकसभा सीट से 1991 से 2004 के बीच जनता दल के शशि प्रकाश, भाजपा के अमृत लाल भारती एक-एक बार और सपा के शैलेंद्र कुमार तीन बार चुने गए जबकि 2009 में चायल लोकसभा को कौशांबी नाम देने के बाद शैलेंद्र कुमार फिर से चुने गए। 2014 में भाजपा के विनोद सोनकर ने जीत हासिल की। गौर करें तो 1984 के बाद लगातार हुए आम चुनाव एवं मध्यावधि चुनाव में कांग्रेस के मतों का प्रतिशत कम होता गया।
शुरुआती दौर में कांग्रेस का दबदबा रहा
0 1952 में हुए पहले आम चुनाव में इलाहाबाद जिले में तीन सांसद फूलपुर से जवाहर लाल नेहरू, इलाहाबाद से श्री प्रकाश एवं चायल से मसुरियादीन चुने गए। 1957 में हुए चुनाव में फूलपुर से जवाहर लाल नेहरू, चायल से मसुरियादीन दोबारा चुने गए। जबकि इलाहाबाद से लाल बहादुर शास्त्री को जीत मिली। 1962 में तीसरे आम चुनाव में एक बार फिर से फूलपुर से जवाहर लाल नेहरू, इलाहाबाद से लाल बहादुर शास्त्री, चायल से मसुरियादीन जीते। इसके बाद 1964 में नेहरू के निधन के बाद हुए उप चुनाव में उनकी बहन विजय लक्ष्मी पंडित चुनाव जीतकर संसद में पहुंचीं। यही हाल इलाहाबाद में भी हुआ। लाल बहादुर शास्त्री के निधन के बाद 1967 में हुए चुनाव में इलाहाबाद से उनके पुत्र हरेकृष्ष्ण शास्त्री चुनाव जीतकर पहली बार संसद में पहुंचे जबकि फूलपुर पर कांग्रेस की विजय लक्ष्मी पंडित और चायल से मसुरियादीन एक बार फिर संसद पहुंचे। विजय लक्ष्मी पंडित के बीच में फूलपुर लोक सभा सीट से इस्तीफा देने के बाद हुए उप चुनाव में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के जनेश्वर मिश्र पहली बार सांसद चुने गए। इस प्रकार जिले में पहली बार कांग्रेस के बाहर से सांसद चुना गया।