प्रयागराज। पीडब्ल्यूडी में हुए सड़क निर्माण घोटाले में बड़े अफसरों की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। कहा जा रहा है कि मानक की अनदेखी करने वाली ठेका फर्र्मों के साथ एक्सईएन, एई और जेई स्तर के अभियंताओं की मिलीभगत को मुख्य अभियंता ने नजर अंदाज किया। यही वजह थी कि गड़बड़ी की शिकायत मिलने के बाद भी न अंकुश लगाया गया न किसी तरह की कार्रवाई की गई। अलबत्ता करोड़ों रुपये का भुगतान जरूर कर दिया गया। इसमें लखनऊ में मुख्य अभियंता (शिकायत प्रकोष्ठ) के पद पर तैनात पीके सक्सेना व हाल में ही स्थानांतरित अधीक्षण अभियंता संजय श्रीवास्तव से भी शासन ने स्पष्टीकरण तलब किया है। इस मामले में मुख्य अभियंता सक्सेना समेत 24 अभियंताओं पर निलंबन की कार्रवाई हो सकती है।
17.7 किमी लंबे खानपुर से कटरा दयाराम-कंचनपुर-शहबाजपुर-हरखपुर-सेमरा से वीरभानपुर होते हुए जोगीपुर मार्ग और 16 किमी लंबे बलरामपुर बाजार से जगतपुर रेलवे क्रासिंग लीलापुर-जमुनीपुर एवं ढाकरी होते हुए बांदा जीटी रोड के चौड़ीकरण व सुदृढ़ीकरण कार्य में अभियंताओं की मिलीभगत से ठेका फर्मों की गड़बड़ी की शिकायतें कई बार मिली थीं। तत्कालीन एसई समेत 24 अभियंताओं के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई व जांच बैठाए जाने के बाद अब कहा जा रहा है कि सब कुछ मुख्य अभियंता हिमांशु मित्तल के आंख मूंदने की वजह से हुआ। कार्रवाई की जद में आए कुछ अवर अभियंताओं ने नाम न छापने के आग्रह पर बताया कि तब मुख्य अभियंता मित्तल दोनों सड़कों का कई बार निरीक्षण कर चुके थे, लेकिन उन्होंने शासन को किसी तरह की अपनी आख्या नहीं दी। अलबत्ता मनमाने तरीकेसे मानक की अनदेखी की जाती रही। मामला तब खुला जब राज्य स्तरीय कमेटी ने इन सड़कों की जांच की।
एक्सईएन कुंभ कठोरिया का घोटाले पर टिप्पणी से इंकार
इस गड़बड़ी केजिम्मेदार कुंभ मेला डिवीजन के तत्कालीन एक्सईएन विपिन पचौरिया ने एटा स्थानांतरित होने के बाद भी अभी वहां ज्वाइन नहीं किया है। उनकी जगह यहां तैनात कुंभ मेला डिवीजन के एक्सईएन सुनील कठेरिया ने इस घोटाले पर किसी तरह की टिप्पणी से इंकार किया है। उनका कहना है कि अभी वह ठीक से डिवीजन केकार्यों को समझ नहीं पाए हैं। गड़बड़ी किस स्तर पर हुई इसे समझने में अभी उनको समय लगेगा।