प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) संयुक्त संघर्ष समिति और पुरा छात्रों ने सोमवार को अलग से रॉयल गार्डन में स्थापना दिवस समारोह मनाया। इस दौरान इविवि को बचाने के लिए लोकपाल की जरूरत बताई गई और सर्वसम्मति से छह प्रस्ताव भी पारित किए गए। इससे पूर्व दीप प्रज्ज्वलन से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। अध्यक्षता उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति सभाजीत यादव ने की।
प्रो. रमाचरण त्रिपाठी ने कहा कि विश्वविद्यालय की वर्तमान दुर्दशा को देखते हुए सीबीआई जांच कराए जाने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालय के लिए लोकपाल की जरूरत पर जोर दिया। पूर्व कमिश्नर बादल चटर्जी ने कहा कि विश्वविद्यालय में वर्तमान में भ्रष्ट लोगों की भरमार हो गई है। ऐसे भष्ट तत्वों को हटाए बिना विश्वविद्यालय को नहीं बचाया जा सकता। न्यायमूर्ति सभाजीत यादव ने कहा कि विश्वविद्यालय का स्तर प्रतिदिन गिरता जा रहा है। इसे बचाने के लिए सरकारी लोकपाल नहीं, बल्कि जन लोकपाल गठित करने की जरूरत है। इस मौके पर पूर्व मंत्री राकेशधर त्रिपाठी ने छह प्रस्ताव रखे, जिन्हें सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान प्रो. रमाचरण त्रिपाठी, प्रो. रंजना कक्कड़, न्यायमूर्ति सभाजीत यादव, आरएस वर्मा, बादल चटर्जी, तेज प्रताप सिंह, राधाकांत ओझा, सतीश अग्रवाल, विनोद चंद्र दुबे, डॉ. सुशील सिन्हा, हौसला प्रसाद तिवारी, विनय चंद्र पांडेय, राकेशधर त्रिपाठी, टीपी सिंह, यूएस राय का अभिनंदन किया गया। इस मौके पर छात्र नेता संजय तिवारी, सुरेश यादव, दिनेश यादव, ऋचा सिंह, भूपेंद्र यादव, रोहित मिश्र,ख् रिशु सिंह, सूर्य प्रकाश मिश्र, रितेश तिवारी, ज्ञान शुक्ला आदि मौजूद रहे।
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पारित किए गए प्रस्ताव
- इविवि के वर्तमान कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू द्वारा की गई अनयमितताओं, भ्रष्टाचार, शिक्षक भर्ती में भाई-भतीजावाद के आरोपों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
- इविवि एवं संघटक कॉलेजों में शिक्षक-छात्र के अनुपात को ध्यान में रखकर नए पद सृजित किए जाएं और उच्चकोटि की आधारभूत सुविधाओं की व्यवस्था की जाए।
- यूजीसी के निर्देश के अनुसार इविवि द्वारा अध्यापकों के पदों के लिए बनाए गए आरक्षण रोस्टर को विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर तत्काल प्रदर्शित किया जाए।ञ
- छात्रों की संख्या को ध्यान में रखकर नए हॉस्टलों का निर्माण कराया जाए और छात्रावासों के परंपरागत स्वरूप को बहाल कर उनमें छात्रों के लिए बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराई जाएं।
- विश्वविद्यालय में भय एवं आतंक का माहौल समाप्त कर अध्यापक संघ, कर्मचारी संघ एवं छात्रसंघ के चुनाव की परंपरागत लोकतांत्रिक पद्धति को प्रारंभ किया जाए।
- महिला शिक्षकों एवं छात्राओं की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाएं।