रविवार को शहीद महेश यादव के परिजनों को ढांढस बंधाने पहुंचे कथावाचक देवकी नंदन ठाकुर महाराज ने कहा कि पाकिस्तान के इस घिनौने हरकत का जवाब देना जरूरी है। उन्होंने शहीद की बहन को रोते-बिलखते देख खुद भावुक हो गए। नम आंखों से श्रद्धांजलि देते हुए परिजनों की हर संभव मदद करने का भरोसा दिलाया। करीब आधे घंटे तक शहीद के परिजनों से वार्ता करने के बाद वे प्रयागराज निकल गए। उनके साथ प्रधान संघ इकाई उरुवा के अध्यक्ष अरूण त्रिपाठी उर्फ टुनटुन, धीरज दूबे, अनूप तिवारी, देवनाथ मिश्रा, पप्पू उपाध्याय, सेठ मिश्रा, अधिवक्ता ओंकारनाथ मिश्रा, धीरज शुक्ला सहित कई लोग रहे।
इसे विडंबना नहीं तो और क्या कहेंगे। जिस शहीद महेश कुमार ने देश के लिए अपनी जान दे दी, उसके घर तक पूरा कैबिनेट व प्रशासन मिलकर भी एक ईंट का खड़ंजा तक न बिछा सका। बीडीओ ने कोशिश भी की तो तीन नंबर के रद्दी ईंटों से कुछ दूर तक सड़क बनाई गई लेकिन वह भी घर से पचास मीटर पहले ही रोक दी गई। शहीद के घर पहुंचे कैबिनेट मंत्री और प्रशासन के लोग पगडंडियों के सहारे यात्रा पूरी की। शहीद के अंतिम संस्कार के दूसरे दिन रविवार को परिजनों ने बीडीओ के द्वारा बनाए गए अधूरे खड़ंजे पर आक्रोश जताया।
पुलवामा हमले में शहीद मेजा के सपूत महेश का पार्थिव शरीर बीते शनिवार को टुड़िहार गांव में पहुंचा तो हर ओर भीड़ उमड़ पड़ी। हजारों की संख्या में पहुंचे लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए शहीद के घर पहुंचने लगे। केंद्रीय कैबिनेट मंत्री अनुप्रिया पटेल, यूपी कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह, मंत्री डॉ. रीता बहुगुणा जोशी, सांसद, डीएम, एसएसपी आदि भी शहीद के सम्मान में घर तक पहुंचे। इस दौरान शहीद के घर तक जाने के लिए सड़क न होने के कारण लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी। हालात यह थे कि सड़क के अभाव शहीद के घर पर पार्थिव शरीर न रखकर स्थानीय प्रशासन ने कुछ दूर पहले रिश्तेदार के घर को ही ठिकाना बना लिया। बीडीओ की पहल पर तीन नंबर के रद्दी ईंटों के सहारे अधूरा खड़ंजा बिछाया गया लेकिन वह भी शहीद के घर से करीब पचास मीटर पहले ही रोक दिया गया।
सूत्रों की माने तो खराब ईंट खत्म होने के कारण खड़ंजा निर्माण रोक दिया गया था क्योंकि अच्छी गुणवत्ता वाली ईंटों के दाम महंगे थे। पार्थिव शरीर के अंतिम संस्कार के दूसरे दिन रविवार को परिजनों में काफी आक्रोश रहा। शहीद के पिता राजकुमार यादव का कहना है कि ब्लॉक कर्मियों ने शहीद के दादा के घर को शहीद का घर बताकर वहीं तक खड़ंजा मार्ग बनवा दिया। जबकि शहीद का घर उसके दादा के घर से पचास मीटर की दूरी पर है। वहीं लोगों को सीएम योगी आदित्यनाथ के न आने का भी मलाल है। रविवार को पत्नी और भाई ने भी मुख्यमंत्री के न आने पर कहा कि चुनावी सभाओं में समय से जाने वाले सीएम को शहीद के घर आने की फुरसत नहीं मिली। अधिवक्ता ओंकारनाथ मिश्रा का कहना है कि मुख्यमंत्री को शहीद के घर आना चाहिए था।