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सरकारी वकीलों को भी अब देनी होगी हाजिरी

Fri, 06 Feb 2015 12:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
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प्रदेश सरकार के पैनल में शामिल स्थायी अधिवक्ताओं, शासकीय अधिवक्ताओं को भी अब हर दिन हाजिरी देनी होगी। हाईकोर्ट में प्रदेश सरकार की पैरवी को और मजबूत करने के लिए महाधिवक्ता ने नया फरमान जारी किया है। तीन फरवरी को महाधिवक्ता कार्यालय द्वारा जारी आदेश में वकीलों के लिए दो घंटे या अधिक दफ्तर में बैठना अनिवार्य कर दिया गया है। उनकी बाकायदा हाजिरी भी ली जाएगी। महाधिवक्ता कार्यालय के कर्मचारियों को भी इस दौरान मौजूद रहना होगा। इस नए आदेश से सरकारी पैनल के वकीलों और कर्मचारियों में हड़कंप है।
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 सबसे अहम यह है कि वकीलों को अब कोर्ट के समय के बाद कम से कम दो घंटे अपने ऑफिस में बैठना अनिवार्य होगा। इतना ही नहीं उनको तब तक बैठना पड़ेगा जब तक कि शासकीय अधिवक्ता और मुख्य स्थायी अधिवक्ता अपने कार्यालय में मौजूद हैं। इस दौरान उनको अगले दिन होने वाले मुकदमों की फाइलें दी जाएंगी ताकि मुकदमा एक दिन पहले ही तैयार कर लें। उस पर आवश्यक जवाब, पत्र आदि लिखवा दें ताकि कोर्ट में सरकार का पक्ष मजबूती से रखा जा सके।

वकीलों की मदद के लिए स्टॉफ को भी पूरे समय मौजूद रहना होगा। सभी अनुभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को ऐसा निर्देश है। इस दौरान लाइब्रेरी खुली रखी जाएगी ताकि अधिवक्ता मुकदमों के लिए केस लॉ आदि देख सकें। आदेश में वकीलों से शनिवार को भी दो घंटे कार्यालय में आकर काम करने के लिए कहा गया है (शनिवार को हाईकोर्ट न्यायिक कार्य के लिए बंद रहता है)। महाधिवक्ता के इस फरमान से सरकारी वकीलों और कर्मचारियों में हड़कंप है। हालांकि इस मामले में कोई खुलकर बोलने को तैयार नहीं है।
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नाम नहीं छापने की शर्त पर कुछ वकीलों और कर्मचारियों का कहना है कि काम के निर्धारित घंटों से अधिक समय तक काम लेना गलत है। कर्मचारी सुबह नौ बजे ही दफ्तर आ जाते हैं। अधिक समय तक काम के एवज में उन्हें कोई ओवर टाइम नहीं दिया जाता है। इसी प्रकार से वकील अपना केस दिन में काम के दौरान या घर पर भी तैयार कर सकते हैं। इस संबंध में महाधिवक्ता विजय बहादुर सिंह से संपर्क  करने का प्रयास किया गया मगर उनका मोबाइल पहुंच से बाहर बताता रहा।
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