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यशोदा फाउंडेशन से विलंब शुल्क की वसूली पर रोक

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद के यशोदा फाउंडेशन से आवंटित भूमि पर निर्माण में विलंब के लिए पांच लाख रुपये जुर्माना वसूली पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण को आदेश दिया है कि दो सप्ताह के भीतर फाउंडेशन से हुए करार की तकनीकी खामियां दूर कर नए सिरे से पट्टा आवंटन कर प्रस्तावित भवन का नक्शा स्वीकृत किया जाए। यशोदा फाउंडेशन की याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अजीत कुमार की पीठ ने दिया है।
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याची की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी और अभिनव गौड़ ने बहस की कि यशोदा फाउंडेशन को विद्यालय निर्माण के लिए भूमि का आवंटन किया गया था। इसकी समस्त राशि का भुगतान उसने कर दिया। एक मई 2007 को उसे नो ड्यूज का प्रमाणपत्र भी मिल गया। मगर, जीडीए के साथ हुए करार में कुछ तकनीकी खामियों के कारण उसका पट्टा स्वीकृत नहीं किया गया। इस बीच अक्तूबर 2019 में जीडीए ने याची संस्था को पांच हजार रुपये का डिमांड नोटिस जारी कर दिया।
कहा गया कि याची ने आवंटित भूमि पर 2016 से अब तक कोई निर्माण नहीं किया है। अधिवक्ता का कहना था कि पट्टा आवंटन और नक्शा स्वीकृत न करने के कारण याची निर्माण नहीं करा सका। कोर्ट ने जीडीए को दो सप्ताह में करार की तकनीकी खामियों को दूर कर पट्टा आवंटन और नक्शा स्वीकृत करने का आदेश दिया था तथा अगले आदेश तक अक्तूबर 2019 में जारी डिमांड नोटिस पर रोक लगा दी है।
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