प्रदेश के सभी विभागों के अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों तथा सचिवों को महाधिवक्ता तथा विधि परामर्शी की जानकारी के बिना विभागों की ओर से अधिक फीस देकर प्राइवेट वरिष्ठ अधिवक्ता रखने पर रोक लगा दी है। विशेष सचिव न्याय इंद्रजीत सिंह ने आदेश जारी कर कहा है कि राज्य विधि अधिकारी पैनल में सुयोग्य अधिवक्ताओं के रहते अधिक फीस देकर बिना औचित्य तथा युक्तियुक्त कारण विभागो की ओर से प्राइवेट वकील रखने से राजकीय कोष पर अनावश्यक भार बढ़ रहा है, जो लोकहित के खिलाफ है।
आदेश में कहा गया है कि आमतौर पर राज्य विधि अधिकारियों से ही बहस कराई जाय। विशेष वकील रखना अपरिहार्य हो तो तथ्य तथा परिस्थितियों का उल्लेख कर महाधिवक्ता कार्यालय को अवगत कराया जाय तथा विधि परामर्शी कार्यालय को संदर्भित किया जाय। प्रदेश के महाधिवक्ता अजय कुमार मिश्र ने विधि परामर्शी प्रमुख सचिव न्याय को पत्र लिखकर शिकायत की थी। कहा था, लखनऊ में एक केस में पांच लाख प्रतिदिन फीस पर प्राइवेट वकील रखा गया। तीन बार केस लगा और 15 लाख फीस दी गई।
महाधिवक्ता ने कहा, योग्य राज्य विधि अधिकारी मौजूद हैं। फिर भी प्राइवेट वकील रख भारी फीस देकर खजाने पर बोझ बढ़ाया जा रहा है। ऐसा करने से पहले उनके कार्यालय को सूचित नहीं किया जाता। यह एलआर मैनुअल के विपरीत है। विधि परामर्शी की अनुमति भी नहीं ली जाती। सरकार के इस आदेश से विभागों की ओर से मनमाने ढंग से भारी फीस पर प्राइवेट वकील रखने का रास्ता बंद कर दिया गया है।