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हाईकोर्ट का फैसला : पेशेवर अपराधी जमानत पाने के हकदार नहीं, ऐसे अपराधी समाज की शांति और भलाई के लिए खतरा

Wed, 19 Jul 2023 11:14 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

हाईकोर्ट ने निचली अदालत को याची के मुकदमे की सुनवाई नियमित करते हुए जल्दी फैसला देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने पुलिस अधीक्षक शाहजहांपुर को मामले के गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश दिया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 14 साल से अधिक समय से जेल में निरुद्ध इनामी शाहजहांपुर के डकैत रमेश उर्फ पुन्ना को राहत देने से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे पेशेवर अपराधी से समाज की शांति और भलाई के लिए खतरा पैदा हो सकता है। ऐसे जघन्य अपराधी जमानत पाने के हकदार नहीं हैं। रमेश के खिलाफ जलालाबाद थाने में सन 2007 में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

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हाईकोर्ट ने निचली अदालत को याची के मुकदमे की सुनवाई नियमित करते हुए जल्दी फैसला देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने पुलिस अधीक्षक शाहजहांपुर को मामले के गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि गवाहों को पुलिस सुरक्षा में न्यायालय लाया जाए और उनके बयान की समुचित वीडियोग्राफी कराई जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी ने रमेश उर्फ पन्ना की जमानत अर्जी को खारिज करते हुए दिया है।

याची पर आरोप है कि उसने 50 हजार रुपये के इनामी डकैत नरेशा धीमर के साथ मिलकर दो व्यक्तियों को अपहृत कर लिया और जब पुलिस छुड़ाने गई तो याची नरेश, भूरा उर्फ कोटेदार, जन्टरू, मैकू उर्फ चेला उर्फ चैंपियन राजकुमार यादव सहित अन्य बदमाशों के साथ मिलकर घातक हथियारों से सुसज्जित होकर बलवा किया, फायरिंग कर ब्रजेश, बबलू एवं अन्य लोगों को घायल कर दिया। आरक्षी यशवीर की गोली मारकर हत्या कर दी।

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याची के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि उसे इस मामले में फर्जी तरीके से फंसाया गया है। अपराध में उसकी कोई भूमिका नहीं है। उसका नाम भी प्राथमिक सूचना रिपोर्ट में नहीं था। उसका नाम दस माह बाद प्रकाश में लाया गया है। उसे घटनास्थल से गिरफ्तार भी नहीं किया गया। उसे घर से गिरफ्तार किया गया। उसे साजिशन नामित किया गया है। वह 14 साल, आठ महीने से जेल में है। वह निर्दोष और गरीब व्यक्ति है। मामले के अन्य आरोपी की इसी कोर्ट द्वारा जमानत मिल चुकी है।

हालांकि अपर शासकीय अधिवक्ता ने जमानत अर्जी का विरोध किया। कहा कि वह पेशेवर अपराधी है। उसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास सहित आईपीसी की विभिन्न धाराओं में पांच प्राथमिकी दर्ज है। वह नरेशा धीमर गैंग का सक्रिय सदस्य है। अगर उसे छोड़ा गया तो समाज में भय और आतंक और फैल जाएगा। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आवेदक को जमानत पर मुक्त किए जाने का कोई औचित्य नहीं है और जमानत अर्जी को निरस्त किए जाने योग्य है।
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