याची के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि उसे इस मामले में फर्जी तरीके से फंसाया गया है। अपराध में उसकी कोई भूमिका नहीं है। उसका नाम भी प्राथमिक सूचना रिपोर्ट में नहीं था। उसका नाम दस माह बाद प्रकाश में लाया गया है। उसे घटनास्थल से गिरफ्तार भी नहीं किया गया। उसे घर से गिरफ्तार किया गया। उसे साजिशन नामित किया गया है। वह 14 साल, आठ महीने से जेल में है। वह निर्दोष और गरीब व्यक्ति है। मामले के अन्य आरोपी की इसी कोर्ट द्वारा जमानत मिल चुकी है।
हालांकि अपर शासकीय अधिवक्ता ने जमानत अर्जी का विरोध किया। कहा कि वह पेशेवर अपराधी है। उसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास सहित आईपीसी की विभिन्न धाराओं में पांच प्राथमिकी दर्ज है। वह नरेशा धीमर गैंग का सक्रिय सदस्य है। अगर उसे छोड़ा गया तो समाज में भय और आतंक और फैल जाएगा। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आवेदक को जमानत पर मुक्त किए जाने का कोई औचित्य नहीं है और जमानत अर्जी को निरस्त किए जाने योग्य है।