इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर कमलेश कुमार गुप्ता के निलंबन आदेश और आरोप पत्र के आधार पर जारी विभागीय जांच पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने विश्वविद्यालय प्रशासन से चार हफ्ते में जवाब मांगा है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर कमलेश कुमार गुप्ता के निलंबन आदेश और आरोप पत्र के आधार पर जारी विभागीय जांच पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने विश्वविद्यालय प्रशासन से चार हफ्ते में जवाब मांगा है। यह भी निर्देश दिया है कि याची को प्रोफेसर के रूप में कार्य करने दें और नियमित वेतन भुगतान भी जारी रखा जाए। अगली सुनवाई 20 जुलाई को होगी।
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न्यायमूर्ति अजित कुमार ने प्रोफेसर कमलेश कुमार गुप्ता की याचिका की सुनवाई करते हुए यह भी जोड़ा कि विश्वविद्यालय की कार्य परिषद चाहे तो अनुशासनात्मक कमेटी का नए सिरे से गठन करके जांच शुरू कर सकती है। कोर्ट में याची की दलील थी कि उसे निलंबित किया गया, किंतु कोई जांच समिति नहीं बनी। विश्वविद्यालय स्टैच्यूट के अनुसार यदि चार हफ्ते तक चार्जशीट देकर कमेटी नहीं बनती तो निलंबन स्वत: समाप्त हो जाएगा।
इस बीच कुलपति ने निलंबन वापस ले लिया, किंतु दोबारा निलंबित कर दिया। चार्जशीट भी दे दी गई। वहीं, विश्वविद्यालय की तरफ से कहा गया कि कुलपति की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय कमेटी ने चार्जशीट का अनुमोदन कर दिया है, इसलिए चार्जशीट मिलते ही निलंबन पुनर्जीवित हो जाएगा। कोर्ट ने मुद्दा विचारणीय माना और अंतरिम राहत देते हुए विश्वविद्यालय से जवाब मांगा है।