फूलपुर (प्रयागराज)। इफ्को फूलपुर इकाई में मंगलवार की रात अमोनिया गैस के भारी रिसाव से दो अफसरों बीपी सिंह और अभय नंदन की मौत के बाद प्लांट एक को बंद कर दिया गया। हादसे के बाद प्लांट एक का उत्पादन पूरी तरह से ठप हो गया। मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं। बुधवार को दिन भर फूलपुर इकाई में अफरातफरी का माहौल रहा। हादसे की चपेट में आने वाले 16 लोगों की हालत अब ठीक है। आठ लोग अभी विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि आठ कर्मचारियों को डिस्चार्ज कर दिया गया।
मंगलवार देर रात फूलपुर इकाई के प्लांट एक में अचानक अमोनिया पाइप में जोर की आवाज हुई और गैस रिसाव शुरू हो गया। सहायक प्रबंधक यूरिया बीपी सिंह तुरंत वहां पहुंचे और वहां से लोगों को निकालने लगे। सहायक प्रबंधक आफ साइड अभय नंदन भी वहां पहुंचे और गैस रिसाव रोकने का प्रयास करने लगे। गैस की चपेट में आने से दोनों अधिकारियों समेत 18 लोग अचेत हो गए थे। घटना से हड़कंप मच गया। दोनों अफसरों और कर्मचारियों को तुरंत विभिन्न अस्पतालों में ले जाया गया, जहां रात में ही दोनों अफसरों की मौत हो गई। 16 कर्मचारियों में से आठ को बुधवार दिन में डिस्चार्ज कर दिया गया, जबकि अन्य दो कर्मचारियों को इफ्को हास्पिटल, छह को निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। जहां उनकी हालत में सुधार है। इफ्को फूलपुर इकाई के प्रमुख एम मसूद ने फूलपुर थाने में तहरीर दी है। तहरीर में हादसे के बारे में पूरी जानकारी दी गई। तहरीर मिलने के बाद पुलिस ने दोनों अधिकारियों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
कैसे हुआ हादसा
फूलपुर। इफ्को अधिकारियों के मुताबिक सी-पाली की ड्यूटी पर जैसे लोग पहुंचे उसके कुछ ही देर बाद अमोनिया पंप का टाइड राड अचानक टूट गया और उसका प्लांजर निकल गया और देखते ही देखते वहां गैस का भारी रिसाव शुरू हो गया। बताया गया कि 230 केजी प्रेशर होने के चलते रिसाव काफी तेज था, जिससे वहां काम कर रहे दोनों अधिकारियों के अलावा 18 अन्य कर्मचारी भी गैस रिसाव में फंस गए।
40 मिनट के भीतर हादसे पर पाया काबू
फूलपुर इकाई के प्रमुख एम. मसूद ने बताया कि प्राथमिक जांच के बाद पता चला है कि पी-1 प्लांट में अमोनिया पाइप का रॉड टूट गया था, जिससे अमोनिया गैस तीव्र गति से निकलने लगी। इस दौरान अमोनिया-1 और यूरिया-1 में काम करने वाले 18 लोग उसकी चपेट में आ गए। दो अफसरों की मौत के बाद यूरिया प्लांट एक को बंद कर दिया गया। लगभग 40 मिनट के भीतर ही रिसाव पर काबू पा लिया गया। अगर स्थिति नियंत्रण में न आती तो हालात और भी बिगड़ सकते थे। हादसे की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं।
अपनी जान गंवाकर कई को जिंदगी दे गए दोनों अफसर
फूलपुर। इफ्को में अमोनिया गैस रिसाव से हुए हादसे में जान गंवाने वाले सहायक मैनेजर वीपी सिंह व अभयनंदन अपनी जान देकर कई साथियों की जान बचा गए। मौत के खतरे को जानते हुए भी दोनों अफसरों ने मौके पर पहुंचकर गैस रिसाव बंद किया। इसके चलते वहां कार्य कर रहे करीब बीस से अधिक लोगों की जान बच गई।
मंगलवार रात इफ्को के पी-1 प्लांट में उत्पादन का कार्य चल रहा था। सी पाली में देर रात दोनों अफसर यूरिया-1 एवं अमोनिया-1 कंट्रोल रूम में मौजूद थे। अचानक सायरन बजा तो वहां भगदड़ मच गई। गैस रिसाव होने लगा। वहां जाने का मतलब जान का खतरा था। फिर भी इफ्को के असिस्टेंट मैनेजर यूरिया व डिप्टी मैनेजर आफसाइट अभयनंदन पुत्र सूर्यनारायण गैस रिसाव को रोकने के लिए पहुंच गए। रिसाव इतना तेज था कि वहां काम कर रहे डेढ़ दर्जन से अधिक लोग वहां फंस चुके थे। अंदर जाने का मतलब जान का खतरा था। इसे जानते हुए भी अफसरों ने अपनी जान की परवाह नहीं की और शोर मचाते हुए वहां फंसे लोगों को बाहर निकालने की कोशिश में जुट गए। लेकिन गैस की चपेट में आने से वे बेहोश हो गए। उनकी जान तो चली गई लेकिन उन्होंने साथी कर्मचारियों की जिंदगी बचा दी।