इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गोरखपुर के एसएसपी को आजमगढ़ के एक शिकायतकर्ता पर अवैध वसूली के लिए ब्लैकमेलिंग करने के लगे आरोप की जांच करने का आदेश दिया है। साथ ही याची की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए सरकार से चार हफ्ते में जवाबी हलफनामा तलब किया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट और न्यायमूर्ति दिवेश चंद्र सामंत की खंडपीठ ने आजमगढ़ के गीडा थान क्षेत्र से जुड़े एक मामले में दिया है। गोरखपुर के एसएसपी को प्रथम सूचनाकर्ता और उसके परिवार के सदस्यों के इसी तरह के मामलों में संलिप्त होने के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने का आदेश दिया है।
याचियों के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि याची और प्रथम सूचनाकर्ता के बीच पहले जान-पहचान थी, लेकिन बाद में संबंध खराब हो गए। आरोप है कि इसी रंजिश में वर्तमान एफआईआर दर्ज कराई गई। व्हाट्सएप चैट का हवाला देते हुए कहा गया कि याची संख्य एक से अवैध वसूली की मांग की गई। अन्य याचियों को केवल याची संख्या एक का मित्र होने के कारण मुकदमे में फंसाया गया है।
पहले भी दर्ज कराए गए मुकदमों का हवाला
याचियों ने आरोप लगाया कि प्रथम सूचनाकर्ता व उसके परिवार की ओर से लोगों को आपराधिक मामलों में फंसाकर पैसे ऐंठने का कथित तौर पर सिलसिला रहा है। इसके समर्थन में गोरखपुर और कुशीनगर के कई पुराने मुकदमों का हवाला दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी हवाला
अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट के सालिब उर्फ शालू के मामले में दिए फैसले का हवाला दिया। कहा कि निजी द्वेष या बदले की भावना से दर्ज कराए गए आपराधिक मामलों में अदालत को केवल एफआईआर के आरोपों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि रिकॉर्ड और परिस्थितियों की भी पड़ताल करनी चाहिए।